गांवों में बदलेगा नामांतरण का नियम, अब मुखिया-सर्पंच देंगे मृत्यु प्रमाण पत्र

पटना। बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों में भूमि विवाद और नामांतरण की लंबी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब पंचायत स्तर पर मुखिया और सरपंच को भी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार मिल गया है। इस कदम से विशेषकर पुराने मामलों में उत्तराधिकार और नामांतरण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

भूमि राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इस नई व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में पटना स्थित राजस्व सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में पंचायत प्रतिनिधियों के संघों के साथ हुई बैठक में यह सुझाव आया था कि पुराने मामलों में, जहां प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, वहां प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर सरल किया जाए।

स्व-घोषणा और स्थानीय सत्यापन से होगा काम
नए नियम के तहत, अगर किसी रैयत या जमाबंदीदार की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है और आधिकारिक प्रमाण पत्र नहीं है, तो उत्तराधिकारी सफेद कागज पर स्व-घोषणा पत्र देकर पंचायत के मुखिया या सरपंच से हस्ताक्षर व सत्यापन करा सकते हैं। इसके अलावा, वंशावली में ‘मृत’ अंकित नाम को भी मान्य माना जाएगा।

पुराने मामलों में आएगी तेजी
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से हजारों लंबित नामांतरण और भूमि विवाद के मामले तेजी से सुलझेंगे। पहले इन प्रमाण पत्रों के लिए ग्रामीणों को ब्लॉक या नगर निकाय के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे प्रक्रिया महीनों तक अटकी रहती थी। अब स्थानीय स्तर पर सत्यापन होते ही नामांतरण की कार्रवाई तुरंत आगे बढ़ सकेगी।

यह फैसला नीतीश सरकार की उन पहलों में शामिल है, जिनका उद्देश्य गांव से लेकर शहर तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाना है। इससे पहले भी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में ढील देकर एक साल से पुराने मामलों में बीडीओ और नगर निकाय अधिकारियों को अधिकार दिया गया था।


 

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