हाईकोर्ट फैसले 3 महीने से ज्यादा लंबित न रखें: सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, जमानत आदेश तुरंत देने को कहा

अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न | TWM News

नई दिल्ली, 29 मई:
देश की न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने देशभर के सभी हाईकोर्ट्स को आदेश दिया है कि किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित (रिजर्व) रखने के बाद उसे अधिकतम 3 महीने के भीतर सुनाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर फैसला नहीं सुनाया जाता है, तो संबंधित मामले को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

जमानत मामलों पर विशेष निर्देश
बेंच ने जमानत से जुड़े मामलों में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आदेश उसी दिन सुनाया जाए। यदि किसी कारणवश फैसला सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन अनिवार्य रूप से सुनाया जाना चाहिए।

वेबसाइट पर दिखानी होगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जब भी किसी मामले का फैसला रिजर्व किया जाए, तो उसकी तारीख संबंधित हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।

मामले की पृष्ठभूमि
दरअसल, यह निर्देश उस समय जारी किए गए जब एक मामले में हाईकोर्ट द्वारा फैसला समय पर अपलोड नहीं किए जाने की शिकायत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आई थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:

  1. निचली अदालतों को जमानत मामलों में दिए गए फैसलों की जानकारी हाईकोर्ट को देनी होगी।
  2. फैसले का ऑपरेटिव हिस्सा (मुख्य आदेश) खुले कोर्ट में सुनाया जाए, जबकि विस्तृत आदेश 7 दिनों के भीतर अपलोड किया जाए।
  3. यदि 15 दिनों के भीतर फैसले का मुख्य भाग अपलोड नहीं होता है, तो पक्षकार आवेदन कर सकते हैं।
  4. 30 दिनों तक कारण न दिए जाने पर मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की जा सकती है।
  5. आपराधिक मामलों, विशेषकर फांसी की सजा से जुड़े मामलों में, यदि आरोपी जेल में है, तो जज 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।

संविधान की धारा 142 का जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने अपने इन निर्देशों के संदर्भ में संविधान की धारा 142 का भी उल्लेख किया। इस धारा के तहत सुप्रीम कोर्ट को “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जिसके तहत वह आवश्यक आदेश जारी कर सकता है।

न्यायिक प्रक्रिया में आएगी तेजी
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, जमानत मामलों में त्वरित निर्णय से आरोपियों को अनावश्यक प्रतीक्षा से राहत मिलेगी।


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