JSSC-CGL विवाद: CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र, 24 दिन बाद भी आंदोलन जारी
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन सरकार के JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद भी खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की है। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि जब तक CBI जांच की मांग स्वीकार नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
झारखंड सरकार ने हाल ही में JSSC-CGL सहित सरकारी भर्ती से जुड़ी कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने के साथ वर्ष 2014 से हुई परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CID जांच कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की भी घोषणा की है।
‘एक बड़ी लड़ाई जीती, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा’
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 24 दिनों के आंदोलन के बाद सरकार ने छात्रों की एक प्रमुख मांग मानी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि CBI जांच की मांग अभी पूरी नहीं हुई है। उनका कहना है कि निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है।
छात्रों का कहना है कि वर्ष 2014 से JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की पूरी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, भविष्य में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग भी जारी है।
देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म की भूख हड़ताल
आंदोलन के प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मंगलवार को रांची के सदर अस्पताल में अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडेय और इरफान अंसारी ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
हालांकि, महतो ने आंदोलन के दूसरे चरण की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि छात्रों की लड़ाई अब ‘भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती व्यवस्था’ के लिए जारी रहेगी। उनका जोर ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करने पर है, जिसमें भविष्य में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की गुंजाइश न रहे।
JSSC-CGL रद्द होने के बाद नया विवाद
सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले से एक नया विरोध भी शुरू हो गया है। JSSC-CGL में सफल रहे करीब 2,000 अभ्यर्थियों ने रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।
इन अभ्यर्थियों की मांग है कि कथित अनियमितताओं की जांच की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द न किया जाए। कुछ अभ्यर्थियों को भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में उम्र सीमा पार हो जाने की भी चिंता है।
इस तरह JSSC-CGL विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग पक्षों का आंदोलन सामने आ गया है—एक ओर छात्र संगठन CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में सफल अभ्यर्थी परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।