पटना, 5 दिसंबर:

बिहार में भूमि सर्वेक्षण कार्य के दौरान पुरानी कैथी लिपि में लिखे दस्तावेजों को पढ़ने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने ठोस पहल की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सर्वेक्षण कर्मियों को कैथी लिपि का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। इसके साथ ही, विभाग ने एक विशेष पुस्तिका का प्रकाशन भी किया है, जो इस लिपि को समझने में मददगार साबित होगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सोमवार को इस पुस्तिका का विधिवत विमोचन किया। उनके साथ विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, सचिव जय सिंह और भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक जे. प्रियदर्शिनी भी उपस्थित थीं। यह पुस्तिका विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है, जिससे आम लोग और अधिकारी इसे आसानी से उपयोग में ला सकें।

कैथी लिपि को लेकर थी बड़ी समस्या
राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि पुराने खतियान और राजस्व दस्तावेज बड़ी संख्या में कैथी लिपि में लिखे गए हैं। सर्वेक्षण कर्मियों और आम नागरिकों को इन दस्तावेजों को समझने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या का फायदा उठाकर कई निजी लोग और दलाल अनावश्यक रूप से पैसे वसूलते थे।

विशेष प्रशिक्षण और शोधकर्ताओं का सहयोग
राजस्व विभाग ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रीतम कुमार की सहायता से कैथी लिपि को सरलता से समझने के लिए यह पुस्तिका तैयार करवाई है। इसके साथ ही, सात जिलों- पश्चिम चंपारण, दरभंगा, समस्तीपुर, सीवान, सारण, मुंगेर और जमुई में तैनात विशेष सर्वेक्षण कर्मियों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया है। जल्द ही राज्य के अन्य जिलों में भी यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

सर्वेक्षण प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता
इस पुस्तिका और प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से न केवल सर्वेक्षण कर्मियों की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि आम लोग भी अपने पुराने दस्तावेजों को समझ सकेंगे। कैथी लिपि को समझने के बाद भूमि स्वामित्व के निर्धारण में अधिक पारदर्शिता और सटीकता आएगी।

मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा, “यह कदम राज्य के रैयतों के लिए एक बड़ी राहत है। कैथी लिपि को समझने की प्रक्रिया अब सरल होगी, जिससे जमीन विवाद और अनावश्यक समस्याओं में कमी आएगी।”

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *