मां जानकी मंदिर पुनर्निर्माण का शुभारंभ: अमित शाह और नीतीश कुमार की उपस्थिति में पुनौराधाम बना ऐतिहासिक साक्षी
– टीडब्ल्यूएम न्यूज रिपोर्टर, सीतामढ़ी से
सीतामढ़ी, 8 अगस्त – पावन पुनौराधाम में शुक्रवार को उस ऐतिहासिक क्षण का आगमन हुआ, जिसका इंतजार श्रद्धालु वर्षों से कर रहे थे। वैदिक मंत्रोच्चार की पवित्र गूंज के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मां जानकी मंदिर के पुनर्विकास परियोजना की आधारशिला रखी। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, केंद्रीय व राज्य मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि और साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को अलौकिक बना दिया।
पुनौराधाम को वैश्विक धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की इस परियोजना की अनुमानित लागत 882.87 करोड़ रुपये तय की गई है। इस परियोजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाले केंद्र और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विशेष स्थान विकसित किए जाएंगे।
धार्मिक आस्था का संगम
शिलान्यास से पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने मां जानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इन नेताओं की उपस्थिति और पूजा कार्यक्रम ने न सिर्फ धार्मिक भावना को बल दिया, बल्कि राजनीतिक-सांस्कृतिक समरसता का भी परिचय दिया।
सुरक्षा में कोई चूक नहीं
गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए सीतामढ़ी प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। पूरे कार्यक्रम स्थल को कई सुरक्षा घेरे में बाँधा गया था और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई।
11 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था
पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सीतामढ़ी द्वारा जारी दिशा-निर्देश में बताया गया कि आगंतुकों की सुविधा के लिए जिले में 11 पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं, जहां आम श्रद्धालु, अधिकारी, मीडिया, संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि अपने वाहनों को व्यवस्थित रूप से खड़ा कर सके।
दुल्हन-सी सजी सीता की जन्मस्थली
पुनौराधाम को इस मौके पर दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान किया गया था। कोलकाता से आए पुष्प-कलाकारों ने मंदिर परिसर को फूलों से सजाकर एक अनुपम दृश्य रचा। दीपों की जगमगाहट और साज-सज्जा के माध्यम से पूरे परिसर को किसी दुल्हन की तरह संवारा गया, जिसने श्रद्धालुओं के हृदय को भक्तिभाव से आप्लावित कर दिया।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
माना जा रहा है कि यह परियोजना न केवल मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सहायक होगी, बल्कि इससे धार्मिक पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। स्थानीय लोगों को रोजगार और क्षेत्रीय विकास की नई संभावनाएं भी प्राप्त होंगी।
संस्कृति और आस्था की नई इबारत लिखी जा रही है — इस ऐतिहासिक दिन ने पुनौराधाम को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम बढ़ाया है।
© TWM News | सीतामढ़ी ब्यूरो