मुंगेर, जमालपुर
लातेहार जिले का आमझरिया गांव आगामी 1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहेगा। यहां आठ दिवसीय अखंड “बाबा नाम केवलम” कीर्तन का आयोजन हो रहा है, जिसमें 180 देशों से हजारों आनंदमार्गी भक्त शामिल होंगे। यह आयोजन आनंद मार्ग प्रचारक संघ के तत्वावधान में हो रहा है, जिसका शुभारंभ संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने किया है।

कीर्तन नगर का वैश्विक आकर्षण
आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने घोषणा की है कि आमझरिया को अब “कीर्तन नगर” के नाम से जाना जाएगा। संघ के अनुसार यह गांव न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक जागरण का केंद्र बनकर उभरेगा। आनंद मार्गी 180 देशों में आध्यात्मिकता के प्रचार में लगे हुए हैं, और इस कीर्तन में इतनी बड़ी संख्या में भक्तों का जुटना इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन विश्व स्तर पर एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव बनेगा।

“बाबा नाम केवलम” का महत्त्व
इस अखंड कीर्तन का आयोजन 1 अक्टूबर से शुरू होकर 8 अक्टूबर तक चलेगा, जिसका महत्त्व इस दिन और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि 8 अक्टूबर 1970 को ही आनंद मार्ग के संस्थापक भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने आमझरिया में “बाबा नाम केवलम” महामंत्र का उद्घोष किया था। इस कीर्तन का उद्देश्य मानवता के कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति को बढ़ावा देना है।

भक्ति है मोक्ष का सर्वोच्च मार्ग
समारोह के दौरान आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने अपने प्रवचन में बताया कि भक्ति जीवन का अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा, “शास्त्रों में ज्ञान, कर्म और भक्ति को मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बताए गए हैं, लेकिन श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने स्पष्ट किया कि भक्ति केवल एक पथ नहीं, बल्कि मोक्ष का सर्वोच्च साधन है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब मनुष्य भक्ति की अनुभूति कर लेता है, तो उसे मोक्ष सहज रूप से प्राप्त हो जाता है।
भक्तों के लिए उत्तम व्यवस्थाएं
आयोजन समिति ने इस भव्य आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। हजारों भक्तों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है। समिति ने सभी आगंतुकों को अनुरोध किया है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं और कीर्तन के माध्यम से अपने जीवन में आध्यात्मिक शांति प्राप्त करें।
निष्कर्ष
आमझरिया का यह आयोजन न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि विश्व स्तर पर भक्ति और आध्यात्मिकता के प्रसार का एक महत्वपूर्ण चरण साबित होगा। “बाबा नाम केवलम” के महामंत्र के साथ, यह क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होगा और आने वाले वर्षों में भक्ति के इस केंद्र को वैश्विक पहचान मिलेगी।