बिहार की पंचायतों को ₹51,923 करोड़ का बड़ा तोहफा, बेहतर प्रदर्शन पर मिलेगा 20% अतिरिक्त फंड
रिपोर्ट: अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न (BAJMC), TWM न्यूज़
पटना: बिहार की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के विकास को नई दिशा देने के लिए 16वें वित्त आयोग ने फंड आवंटन प्रणाली में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बेहतर प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतों को 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही यह प्रणाली राज्यभर में लागू कर दी जाएगी।
ग्राम पंचायतों की हिस्सेदारी बढ़ी
नए फॉर्मूले के तहत विकास योजनाओं के लिए मिलने वाली कुल राशि में ग्राम पंचायतों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 80 प्रतिशत कर दी गई है, जो पहले 70 प्रतिशत थी। वहीं पंचायत समितियों और जिला परिषदों की हिस्सेदारी 15-15 प्रतिशत से घटाकर 10-10 प्रतिशत कर दी गई है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि सभी पंचायतों को मूल अनुदान मिलेगा, लेकिन जो पंचायतें अपने संसाधनों और आय में वृद्धि के लिए बेहतर प्रयास करेंगी, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
स्वच्छता और जल प्रबंधन पर फोकस
वित्त आयोग ने फंड के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कुल आवंटित राशि का 50 प्रतिशत ‘टाइड फंड’ होगा, जिसका उपयोग केवल स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। शेष 50 प्रतिशत ‘अनटाइड फंड’ के रूप में उपलब्ध रहेगा, जिसे स्थानीय जरूरतों और ग्रामसभा के प्रस्तावों के आधार पर खर्च किया जा सकेगा। हालांकि, इस राशि का उपयोग वेतन या प्रशासनिक खर्चों के भुगतान में नहीं किया जा सकेगा।
पांच वर्षों में ₹51,923 करोड़ का आवंटन
वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक बिहार की पंचायतों के लिए कुल ₹51,923 करोड़ की अनुशंसा की गई है। यह राशि 15वें वित्त आयोग की तुलना में लगभग ₹20,000 करोड़ अधिक है। इसमें ₹41,539 करोड़ बेसिक ग्रांट और ₹10,384 करोड़ प्रदर्शन आधारित अनुदान शामिल हैं। फंड आवंटन का आधार 2011 की जनगणना को बनाया गया है, जिसके अनुसार राज्य की पंचायतों की आबादी करीब 8.5 करोड़ है।
ग्रामीण विकास को मिलेगा नया बल
इस बड़ी वित्तीय सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, सोलर स्ट्रीट लाइट, पेयजल योजनाएं, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन और ओपन जिम जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पंचायतों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और बेहतर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित करना है।