बिहार में ‘कोटे के अंदर कोटा’ पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, बोले- सबसे वंचित तबकों को मिले आरक्षण का लाभ

पटना। बिहार में अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में ‘कोटे के अंदर कोटा’ यानी उप-वर्गीकरण को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने एक बार फिर आरक्षण के भीतर सब-कोटा लागू करने की जोरदार वकालत की है।

मांझी का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में आरक्षण का लाभ कुछ अपेक्षाकृत सक्षम जातियों और परिवारों तक ज्यादा पहुंच रहा है, जबकि अनुसूचित जाति के कई अत्यंत वंचित समुदाय अभी भी पीछे हैं। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर वास्तविक रूप से सबसे पिछड़े वर्गों तक लाभ पहुंचाना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

जीतन राम मांझी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के बाद राज्यों को SC और ST वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का रास्ता मिला है। उनका तर्क है कि बिहार को भी इस अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आरक्षण के भीतर अलग-अलग वंचित समूहों के लिए हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में उप-वर्गीकरण के उदाहरण का भी हवाला दिया। मांझी के मुताबिक, ऐसी व्यवस्था से उन समुदायों को आगे आने का अवसर मिल सकता है जो लंबे समय से आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं उठा पाए हैं।

चिराग पासवान से बढ़ा मतभेद

आरक्षण के मुद्दे पर मांझी का रुख केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से अलग है। चिराग पासवान आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताते हुए इसकी समीक्षा या मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का विरोध कर रहे हैं। वहीं मांझी का कहना है कि समीक्षा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि इसके लाभ का अधिक न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना है।

मांझी ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य आरक्षण समाप्त करना नहीं है। वे चाहते हैं कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक न्याय के लक्ष्य के अनुरूप आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

NDA में आरक्षण को लेकर बढ़ी सियासी गर्मी

मांझी के बयान से बिहार NDA के भीतर आरक्षण को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है। एक ओर मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन SC-ST उप-वर्गीकरण के समर्थन में हैं, वहीं चिराग पासवान इसके विरोध में खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।

ऐसे में बिहार की राजनीति में ‘आरक्षण बचाने’ और ‘आरक्षण का लाभ सबसे वंचित तक पहुंचाने’ के दो अलग-अलग तर्कों के बीच सियासी टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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