बिहार में छात्र मुद्दों पर तेजस्वी का राजभवन मार्च, पेपर लीक से लेकर TRE-4 तक उठे सवाल

पटना। बिहार में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बुधवार को पटना में राजभवन मार्च निकाला। मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया और तेजस्वी यादव को हिरासत में लिया गया।

राजभवन मार्च के जरिए RJD ने राज्य में कथित पेपर लीक, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। तेजस्वी यादव ने इससे पहले बिहार की परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और आरोप लगाया था कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

TRE-4 नोटिफिकेशन के बाद भी छात्रों का आंदोलन

इसी बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी TRE-4 के तहत 32,388 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है।

प्रदर्शनकारी छात्रों की शिकायत है कि TRE-1 से लेकर TRE-4 तक भर्ती प्रक्रिया में देरी और नियुक्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं ने अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ाई है। कई अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्ध नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

छात्र संगठनों की ओर से सिंगल एग्जाम और नो निगेटिव मार्किंग जैसी मांगें भी उठाई जा रही हैं। पटना का गर्दनीबाग फिलहाल छात्र आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।

सीवान फायरिंग मामला भी बना मुद्दा

राजभवन मार्च में सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित AK-47 फायरिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। RJD ने इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया था कि प्रदर्शन के दौरान फायरिंग का आदेश किस स्तर से दिया गया।

19 अगस्त के मार्च से पहले तेजस्वी ने पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की आशंका भी जताई थी और आरोप लगाया था कि छात्रों को पटना पहुंचने से रोका जा रहा है।

राजभवन मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति और गरमा गई है। एक तरफ RJD इसे छात्रों और युवाओं की आवाज उठाने वाला आंदोलन बता रही है, वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अलग पक्ष सामने आ रहा है।

TRE-4 की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और छात्रों के आंदोलन के साथ बिहार में शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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