बिहार में शिक्षकों के तबादले पर बड़ा फैसला, 2 साल सेवा बची तो नहीं होगा ट्रांसफर
पटना: बिहार में सरकारी शिक्षकों के तबादले को लेकर शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि समाप्त होने में अब केवल दो साल या उससे कम समय बचा है, उन्हें तबादले की प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य तबादला नीति को अधिक व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनाना है।
दो साल की सेवा वाले शिक्षकों को राहत
शिक्षा मंत्री के मुताबिक, ऐसे शिक्षक जिनकी नौकरी में अब केवल दो साल की अवधि शेष है, उन्हें अनावश्यक रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। इससे सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पसंद के आधार पर होगा तबादला
बिहार की नई शिक्षक तबादला व्यवस्था में प्रक्रिया को ऑनलाइन और विकल्प आधारित बनाया गया है। शिक्षक तबादले के लिए अपनी पसंद के स्कूलों का विकल्प दे सकते हैं। पहले से घोषित व्यवस्था के अनुसार, आवेदन करने वाले शिक्षकों को उनकी पसंद के विकल्पों में से ही स्कूल आवंटित करने का प्रयास किया जाएगा।
पांच साल में तबादले का प्रावधान
नई व्यवस्था में शिक्षकों को जिला कैडर प्रणाली से जोड़ने और पांच साल के अंतराल पर तबादले का प्रावधान रखा गया है। पहले शिक्षकों को पूरे सेवा काल में सीमित संख्या में तबादले का अवसर मिलता था। नई नीति में प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और ऑनलाइन बनाने पर जोर दिया गया है।
खाली और अतिरिक्त शिक्षकों का होगा समायोजन
शिक्षा विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती अलग-अलग जिलों में शिक्षकों की संख्या में असमानता है। कुछ स्कूलों में शिक्षक जरूरत से अधिक हैं, जबकि कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। सरकार अतिरिक्त शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजने की योजना पर काम कर रही है जहां शिक्षकों की आवश्यकता अधिक है।
ऑनलाइन प्रक्रिया पर जोर
तबादला प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का उद्देश्य शिक्षकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। शिक्षा विभाग ने तबादले और पदस्थापन की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप संचालित करने पर जोर दिया है।