बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से, सम्राट सरकार पेश करेगी दूसरा अनुपूरक बजट
5 दिनों तक चलेगी सदन की कार्यवाही, 3 दिसंबर को बजट पर होगी चर्चा और मतदान; 4 दिसंबर को सत्र का समापन
पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुलाया गया है। बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश करेगी। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शनिवार को विधानसभा सचिवालय की ओर से इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी की गई।
पहले दिन पेश होगा अनुपूरक बजट
सत्र की शुरुआत 30 नवंबर को सुबह 11 बजे विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही के साथ होगी। पहले दिन सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 की द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी सदन के पटल पर रखेगी। इसके अलावा राज्यपाल द्वारा पिछले सत्र के बाद जारी किए गए अध्यादेशों की प्रमाणित प्रतियां भी सदन में प्रस्तुत की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर नए निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने का कार्यक्रम भी होगा।
3 दिसंबर को बजट पर होगी चर्चा
विधानसभा के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 1 और 2 दिसंबर को सरकारी विधेयकों तथा अन्य राजकीय कार्यों को पूरा किया जाएगा। वहीं, 3 दिसंबर को दूसरे अनुपूरक बजट पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद बजट को मंजूरी के लिए मतदान कराया जाएगा। इससे संबंधित विनियोग विधेयक भी सदन में पेश किया जाएगा।
4 दिसंबर को समाप्त होगा सत्र
शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन यानी 4 दिसंबर को विधानसभा में गैर-सरकारी सदस्यों के संकल्पों पर चर्चा होगी। वहीं, विधान परिषद में अनुपूरक बजट पर सामान्य चर्चा और विनियोग विधेयक से संबंधित कार्यवाही निर्धारित की गई है। इसके साथ ही पांच दिवसीय सत्र का समापन हो जाएगा।
विधान परिषद का भी तय हुआ कार्यक्रम
विधान परिषद में 30 नवंबर को नए सदस्यों के शपथ ग्रहण और अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखने के साथ अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया जाएगा। 1 दिसंबर को गैर-सरकारी सदस्यों के संकल्प और 2 तथा 3 दिसंबर को सरकारी विधेयकों एवं अन्य कार्यों पर चर्चा होगी। अंतिम दिन बजट पर सामान्य वाद-विवाद और विनियोग विधेयक से संबंधित कार्यवाही होगी।
पांच दिनों के इस सत्र में सरकार के अतिरिक्त खर्चों को मंजूरी देने के साथ कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए जाएंगे। वहीं, विपक्ष के पास भी सरकार से विभिन्न जनहित और राज्य से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने का अवसर होगा।