राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व सांसद आरके सिन्हा, बेटे ऋतुराज ने दी मुखाग्नि; सीएम सम्राट चौधरी ने बताया अपूरणीय क्षति

पटना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और एसआईएस ग्रुप के संस्थापक डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। पटना के दीघा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे और भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा ने मुखाग्नि दी। उनके निधन से बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर है।

डॉ. आरके सिन्हा का शुक्रवार को 75 वर्ष की उम्र में नोएडा स्थित उनके आवास पर संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पटना के पाटलिपुत्र स्थित आवास ‘अन्नपूर्णा भवन’ लाया गया था। शनिवार सुबह से ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।

सीएम सम्राट चौधरी और राबड़ी देवी ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अन्नपूर्णा भवन पहुंचकर आरके सिन्हा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने उनके बेटे ऋतुराज सिन्हा और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को बिहार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं। इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल, मिथिलेश तिवारी, सांसद रविशंकर प्रसाद सहित कई जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

जनसंघ से भाजपा तक का लंबा राजनीतिक सफर

डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा को भाजपा के संस्थापक सदस्यों में गिना जाता था। उन्होंने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़कर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। जनसंघ के दौर से सक्रिय रहे सिन्हा ने भाजपा संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 2014 में वह बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2020 तक उच्च सदन के सदस्य रहे। वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी जुड़े रहे। पार्टी संगठन में उनकी पहचान एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता के रूप में थी।

पत्रकारिता से सुरक्षा उद्योग तक बनाई पहचान

राजनीति के अलावा आरके सिन्हा ने पत्रकारिता और उद्यमिता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहचान बनाई। उन्होंने एसआईएस (SIS) समूह की स्थापना की, जो देश की प्रमुख निजी सुरक्षा सेवा कंपनियों में शामिल है। उनके नेतृत्व में इस समूह ने सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक कारोबार खड़ा किया।

एक पत्रकार, राजनेता और उद्यमी के रूप में उनकी बहुआयामी पहचान रही। उनके निधन को बिहार के राजनीतिक और औद्योगिक जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

दीघा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

अंतिम दर्शन के बाद उनके पार्थिव शरीर को दीघा घाट ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। बेटे ऋतुराज सिन्हा ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्यों, भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में शुभचिंतकों की मौजूदगी रही।

आरके सिन्हा के निधन से बिहार भाजपा ने अपना एक अनुभवी संगठनकर्ता खो दिया है। उनके राजनीतिक योगदान और उद्यमिता के क्षेत्र में स्थापित पहचान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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