सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख, मध्यस्थता अदालत के फैसले को किया खारिज
नई दिल्ली। भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) के हालिया फैसले को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के साथ 1960 की यह संधि फिलहाल ‘स्थगित’ (abeyance) है और भारत का यह फैसला प्रभावी बना हुआ है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिस तथाकथित मध्यस्थता अदालत ने यह फैसला दिया है, उसका गठन ही संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। भारत ने कहा कि वह इस निकाय की वैधता को कभी स्वीकार नहीं करता और पहले भी उसके फैसलों को मानने से इनकार करता रहा है।
भारत ने अदालत के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
MEA ने कहा कि भारत ने इस कथित मध्यस्थता अदालत के समक्ष कभी हिस्सा नहीं लिया और न ही उसके पूर्व के किसी आदेश को मान्यता दी है। भारत का कहना है कि यह निकाय भारत के संप्रभु फैसलों पर अधिकार क्षेत्र नहीं रखता और उसके वर्तमान या भविष्य के फैसलों का भारत की परियोजनाओं तथा नीतियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि पर रोक
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराते हुए संधि पर रोक लगाने का फैसला किया था।
भारत के ताजा रुख से साफ है कि नई दिल्ली फिलहाल संधि को सामान्य स्थिति में बहाल करने के मूड में नहीं है और सिंधु जल से जुड़े मामलों में अपने फैसलों को संप्रभु अधिकार के रूप में देख रही है।