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हॉर्मुज संकट पर भारत की सख्त कूटनीतिक पहल, UK बैठक में विदेश सचिव ने उठाई ‘फ्री नेविगेशन’ की मांग

नई दिल्ली, 2 अप्रैल: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका दिखाई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यूनाइटेड किंगडम द्वारा आयोजित अहम बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) की जरूरत पर जोर दिया।

यह बैठक वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें 60 से अधिक देशों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट का समाधान निकालना और वैश्विक व्यापार के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाना था।

भारत ने दिया कूटनीति और संवाद का संदेश

बैठक में अपने संबोधन के दौरान विक्रम मिस्री ने कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल तनाव कम करने, कूटनीति और संवाद के रास्ते से ही संभव है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही और सुरक्षित समुद्री परिवहन के सिद्धांतों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

ऊर्जा सुरक्षा पर भी जताई चिंता

भारत ने इस संकट के अपने ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को भी प्रमुखता से उठाया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हमलों में भारतीय नाविकों को भी नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ जाती है।

UK ने ईरान पर साधा निशाना

बैठक में ब्रिटेन की विदेश मंत्री ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया। उन्होंने इस मार्ग को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने की बात कही।

भारत का स्पष्ट रुख

भारत ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मुक्त और सुरक्षित समुद्री व्यापार का समर्थन करता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

इस बीच, वैश्विक स्तर पर जारी इस संकट को देखते हुए आने वाले दिनों में और बड़े कूटनीतिक प्रयासों की संभावना जताई जा रही है।

 

Photo Credit – IANS

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