जामिया में छात्रों के आंदोलन की जीत, 20 साल बाद 2027 में होंगे छात्रसंघ चुनाव; प्रशासन ने मानी मांगें

नई दिल्ली। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2027 में छात्रसंघ चुनाव कराने की समयसीमा तय कर दी है। गुरुवार देर रात प्रशासन के इस फैसले के बाद पिछले 18 दिनों से जारी भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया। छात्रों ने इसे अपने अधिकारों की बड़ी जीत बताया।

15 मई 2027 तक लागू होगा छात्रसंघ का संविधान

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ (JMISU) के संविधान को 15 मई 2027 तक मंजूरी देकर लागू किया जाएगा। इसके बाद अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे। नया शैक्षणिक सत्र 16 जुलाई 2027 से शुरू होने की संभावना है।

चुनाव की प्रक्रिया लिंगदोह समिति की सिफारिशों और दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की जाएगी। विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं।

18 दिनों की भूख हड़ताल के बाद खत्म हुआ आंदोलन

छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर छात्र 11 अक्टूबर से आंदोलन कर रहे थे, जबकि 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल शुरू हुई थी। छात्र इबिन बेसिल लगातार 18 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे। उनके साथ अन्य छात्र भी विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

प्रशासन की ओर से चुनाव की निश्चित समयसीमा घोषित किए जाने के बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इसके बाद परिसर में छात्रों ने जश्न मनाया और छात्र एकता के नारे लगाए।

प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई भी वापस

विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े छात्रों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस, निलंबन, निष्कासन और परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे सभी अनुशासनात्मक आदेश वापस लेने पर सहमति जताई है।

इस फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अपना धरना और भूख हड़ताल तत्काल समाप्त कर दी।

20 साल बाद फिर लौटेगा छात्रसंघ चुनाव का दौर

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में वर्ष 2006 में परिसर में हुई हिंसक घटनाओं के बाद छात्रसंघ भंग कर दिया गया था। इसके बाद करीब दो दशक तक विश्वविद्यालय में चुनाव नहीं हुए। छात्र लगातार निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली की मांग उठाते रहे।

इस आंदोलन के दौरान परिसर में तनाव बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय ने कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएं और परीक्षाएं संचालित करने का फैसला लिया था। अब प्रशासन ने शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य करने और छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है।

करीब दो दशक बाद चुनाव की समयसीमा तय होने से जामिया के छात्रों में उत्साह है। हालांकि, अब सबकी नजरें मई 2027 तक छात्रसंघ संविधान लागू होने और उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने पर टिकी हैं।

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