बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों में 16.85 लाख लोग प्रभावित; गंगा कई जगह खतरे के निशान से ऊपर

पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 11 जिलों में करीब 16.85 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। गंगा नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि अगले दो दिनों में और बारिश की संभावना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

61 प्रखंड और 300 पंचायतें प्रभावित

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ का पानी राज्य के 61 प्रखंडों और 300 ग्राम पंचायतों तक फैल चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में नावें और बचाव दल तैनात किए हैं।

1,158 नावें और 34 बचाव दल तैनात

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही और निकासी के लिए 1,158 नावें लगाई गई हैं। इसके अलावा 27 एसडीआरएफ और 7 एनडीआरएफ टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। राहत व्यवस्था के तहत 80 सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं, जहां अब तक करीब 1.21 लाख लोगों को भोजन कराया गया है।

प्रशासन ने करीब 45,900 पॉलीथिन शीट और 11,700 सूखा राशन पैकेट भी वितरित किए हैं। एक राहत शिविर में फिलहाल 326 लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पटना, भागलपुर और मुंगेर में गंगा उफान पर

जल संसाधन विभाग के रविवार सुबह के आंकड़ों के मुताबिक, पटना के दीघाघाट में गंगा खतरे के निशान से 1.54 मीटर, गांधीघाट में 1.96 मीटर और हाथीदह में 1.74 मीटर ऊपर बह रही थी। सुल्तानगंज में जलस्तर खतरे के निशान से 2.01 मीटर ऊपर दर्ज किया गया।

भागलपुर में गंगा 0.65 मीटर और मुंगेर में 0.51 मीटर ऊपर बह रही थी। मुंगेर में जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहा। कहलगांव और बक्सर में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर रही।

अगले दो दिनों में बारिश का अनुमान

बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अगले दो दिनों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। ऐसे में नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए प्रशासन को राहत एवं बचाव के लिए तैयार रखा गया है।

सीएम ने दिए चौबीसों घंटे तटबंधों की निगरानी के निर्देश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए तटबंधों और स्लुइस गेटों की 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई बढ़ाने, मोबाइल मेडिकल टीम और दियारा क्षेत्रों में नाव एंबुलेंस उपलब्ध कराने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने गंगा, कोसी, गंडक और सोन के तटबंधों को मजबूत करने के साथ गंगा में ड्रेजिंग और गाद निकालने के काम पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर गंगा का पानी करीब 20 किलोमीटर तक फैल रहा है, इसलिए स्थायी समाधान के लिए रिंग बांध और नए तटबंधों का निर्माण आवश्यकतानुसार किया जाएगा।

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