बिहार में बिजली कटौती की जानकारी अब मोबाइल पर पाएंगे सांसद-विधायक और मुखिया

सम्राट सरकार लागू करेगी नई व्यवस्था, पंचायतवार बिजली आपूर्ति का दैनिक ब्योरा जनप्रतिनिधियों के मोबाइल पर भेजा जाएगा

पटना। बिहार में बिजली आपूर्ति को लेकर अब जनप्रतिनिधियों को बार-बार अधिकारियों से जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राज्य सरकार एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसके तहत सांसद, विधायक और पंचायतों के मुखिया को उनके क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की प्रतिदिन की जानकारी मोबाइल फोन पर भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। यह टीम पंचायतवार बिजली आपूर्ति की स्थिति का आकलन करेगी और प्रतिदिन कुल कितने घंटे बिजली उपलब्ध कराई गई, इसकी जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधियों के निर्धारित मोबाइल नंबर पर भेजेगी।

पंचायत स्तर पर होगी बिजली आपूर्ति की निगरानी

नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की वास्तविक स्थिति की जानकारी जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना है। इससे संबंधित क्षेत्रों में बिजली कटौती और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों की निगरानी में मदद मिलेगी। जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की स्थिति से अवगत रह सकेंगे और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के सामने समस्याएं उठा सकेंगे।

जलमीनारों पर लगेंगे 20 किलोवाट के सोलर पैनल

बैठक में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने जलमीनारों पर पांच किलोवाट के प्रस्तावित सोलर पैनल की जगह 20 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाने को कहा। इसके साथ ही नए पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के एस्टीमेट में सोलर ऊर्जा की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से शामिल करने का निर्देश दिया।

पंचायत सरकार भवनों के रखरखाव की भी तय होगी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने पंचायत सरकार भवनों के निर्माण कार्य में तेजी लाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण करने वाले संवेदकों को सौंपने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन निर्माण के साथ उनकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता पर भी ध्यान दिया जाए।

सरकार की इस प्रस्तावित व्यवस्था से पंचायत स्तर पर बिजली आपूर्ति की निगरानी को अधिक पारदर्शी बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

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