बिहार सिपाही भर्ती पेपरलीक कांड में ED की बड़ी कार्रवाई, आरोपी की 2.01 करोड़ की पांच संपत्तियां जब्त
पटना। बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 के पेपरलीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के पटना जोनल कार्यालय ने मामले के आरोपी कौशिक कुमार कर से जुड़ी 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियां एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं। यह कंपनी कौशिक कुमार कर के नियंत्रण और स्वामित्व से जुड़ी बताई गई है। एजेंसी का आरोप है कि सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छपाई के ठेके में कथित धोखाधड़ी और पेपरलीक से जुड़े अपराध के जरिए हासिल की गई रकम को फर्जी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर किया गया।
5.9 करोड़ रुपये एडवांस लेकर ठेके में गड़बड़ी का आरोप
ईडी की जांच के मुताबिक, कौशिक कुमार कर ने कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के माध्यम से परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल किया था। एजेंसी का दावा है कि इस कंपनी के पास न तो प्रिंटिंग का पूर्व अनुभव था और न ही अपनी कोई प्रिंटिंग प्रेस थी। आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की भूमिका छिपाने के लिए कैल्टेक्स को आगे किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, कैल्टेक्स को प्रश्नपत्र छपाई के लिए 5.9 करोड़ रुपये अग्रिम मिले थे। लेकिन कंपनी ने पूरी राशि संबंधित प्रिंटिंग कंपनी को नहीं भेजी। ईडी का आरोप है कि 2.01 करोड़ रुपये विभिन्न फर्जी कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेज दिए गए।
कोलकाता की फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से रकम छिपाने का आरोप
ईडी की जांच में कथित तौर पर कोलकाता स्थित कई ऐसी कंपनियों और संस्थाओं का पता चला, जिनका वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं था। एजेंसी के अनुसार, रकम को फर्जी लेन-देन के जरिए अलग-अलग संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया और बाद में नकदी में बदल दिया गया, जिससे धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो गया।
अपराध से प्राप्त रकम का आगे पता नहीं चलने पर ईडी ने एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर मौजूद पांच अचल संपत्तियों को समान मूल्य की संपत्ति के रूप में अस्थायी तौर पर जब्त किया है।
21,391 पदों की भर्ती परीक्षा हुई थी रद्द
बिहार पुलिस में 21,391 सिपाही पदों पर भर्ती के लिए 1 अक्टूबर 2023 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतों के बाद केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) ने परीक्षा रद्द कर दी थी। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU), पटना ने की थी। बाद में ईओयू की प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने धनशोधन के पहलू से जांच शुरू की।
पूर्व डीजीपी एसके सिंघल की भूमिका का भी जिक्र
ईडी की जांच में कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को प्रश्नपत्र छपाई का ठेका दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, यह ठेका केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी एसके सिंघल के कार्यकाल में दिया गया था। जांच में ठेका हासिल करने, काम दूसरी कंपनी को सौंपने और कथित वित्तीय अनियमितताओं की कड़ियों की पड़ताल की गई है।
ईडी ने कहा है कि मामले में अपराध से प्राप्त अन्य रकम का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल अन्य आरोपियों तथा संस्थाओं की भूमिका की जांच जारी है।