यूरोप की सड़कों पर बढ़ता गुस्सा: स्कूल-कॉलेज से शुरू हुआ आंदोलन, कई देशों में हिंसा तक पहुंचा

पेरिस। यूरोप के कई हिस्सों में इन दिनों छात्रों, कर्मचारियों और आम लोगों का असंतोष सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शिक्षा में कटौती, बढ़ती जीवन-यापन लागत, महंगे आवास, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाल स्थिति जैसे मुद्दों को लेकर फ्रांस, बेल्जियम और इटली में बड़े प्रदर्शन हुए हैं। कुछ स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़पों में भी बदल गए।

फ्रांस से शुरू हुई आंदोलन की तेज लहर

फ्रांस में विरोध की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था से जुड़े छात्रों के मुद्दों से हुई। शिक्षक की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षा व्यवस्था में निवेश की कमी को लेकर छात्र सड़कों पर उतरे। बाद में आंदोलन का दायरा बढ़ा और इसमें ट्रेड यूनियन, अभिभावक तथा अन्य सामाजिक समूह भी शामिल हो गए।

17 अक्टूबर को फ्रांस में करीब 5.5 लाख प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने की जानकारी सरकारी आंकड़ों में दी गई। आयोजकों ने यह संख्या करीब 8 लाख बताई। अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ शहरों में पुलिस से झड़प, आगजनी और दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।

बेल्जियम और इटली में भी छात्रों का प्रदर्शन

बेल्जियम में छात्रों का विरोध ट्यूशन फीस, कक्षाओं में भीड़ और शिक्षा बजट में कटौती जैसे मुद्दों को लेकर शुरू हुआ। आंदोलन कई शहरों तक फैल गया और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ टकराव की स्थिति भी बनी।

इटली में भी छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों में सरकारी खर्च और अन्य नीतिगत मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। कई शहरों में छात्र आंदोलनों के साथ महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर व्यापक असंतोष भी सामने आया।

महंगाई और सार्वजनिक सेवाएं बना बड़ा मुद्दा

यूरोप में अलग-अलग देशों के प्रदर्शन के कारण एक जैसे नहीं हैं, लेकिन महंगाई, कम आय, महंगा आवास और सरकारी सेवाओं पर बढ़ता दबाव कई आंदोलनों में साझा मुद्दे हैं। सरकारें बजट घाटे और बढ़ती वित्तीय लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं, जबकि प्रदर्शनकारी शिक्षा और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं पर ज्यादा खर्च की मांग कर रहे हैं।

फ्रांस में आंदोलन के हिंसक हिस्से ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था की चुनौती भी खड़ी कर दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का संकेत दिया है।

यूरोप में जारी यह विरोध फिलहाल अलग-अलग देशों के स्थानीय मुद्दों से जुड़ा है, लेकिन इसकी व्यापक तस्वीर एक ऐसे जन-असंतोष की ओर इशारा करती है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, महंगाई और बेहतर जीवन-स्तर प्रमुख सवाल बनकर उभर रहे हैं।

TWM News | इंटरनेशनल

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