आरक्षण पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले- संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव नहीं होना चाहिए
मोतिहारी: बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि संविधान में दिए गए आरक्षण संबंधी प्रावधानों को मौजूदा स्वरूप में जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज में समानता स्थापित करना है और जब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं होता, तब तक व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।
‘आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान बने रहें’
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को बनाए रखने की बात करती रही है। उनके मुताबिक, आरक्षण सामाजिक समानता हासिल करने के उद्देश्य से लागू किया गया था और इसे तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक समाज में समानता का लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आरक्षण को लेकर अलग-अलग पहलुओं पर बहस हो सकती है, लेकिन संवैधानिक ढांचे में बदलाव को लेकर उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है।
सब-कैटेगरी पर अलग बहस
प्रशांत किशोर ने आरक्षण के भीतर सब-कैटेगरी या उप-वर्गीकरण के मुद्दे को अलग विषय बताया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में इस विषय पर वर्षों से चर्चा चल रही है। उनके मुताबिक, तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में भी इस उद्देश्य से एक आयोग का गठन किया गया था।
उन्होंने संकेत दिया कि आरक्षण के भीतर लाभ के समान वितरण को लेकर बहस अपनी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संविधान में आरक्षण से जुड़े मूल प्रावधानों को बदल दिया जाए।
2023 में भी रख चुके हैं यही रुख
आरक्षण को लेकर प्रशांत किशोर का यह रुख नया नहीं है। जनवरी 2023 में भी उन्होंने कहा था कि संविधान में दिया गया आरक्षण उचित है और इसे तब तक जारी रखा जाना चाहिए, जब तक समाज में सामाजिक समानता हासिल नहीं हो जाती।
उस समय भी उन्होंने आरक्षण को सामाजिक समानता से जोड़ते हुए इसके औचित्य का समर्थन किया था।
‘जाति से आगे की राजनीति’ के बीच बयान अहम
प्रशांत किशोर की राजनीति में विकास और जातीय पहचान से ऊपर उठकर राजनीतिक एजेंडा बनाने की बात प्रमुख रही है। ऐसे में आरक्षण पर उनका ताजा बयान बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में राज्य में आरक्षण के भीतर ‘कोटा के अंदर कोटा’ और एससी आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।
इसी मुद्दे पर एनडीए के नेताओं के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी उप-वर्गीकरण के पक्ष में हैं, जबकि चिराग पासवान ने इस तरह की व्यवस्था पर आपत्ति जताई है।