46 साल बाद कर्तिकेय महादेव मंदिर में गूंजी होली की बयार, कड़ी सुरक्षा के बीच उल्लासपूर्ण उत्सव

खग्गू सराय। 46 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कर्तिकेय महादेव मंदिर में इस वर्ष धूमधाम से होली का पर्व मनाया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने रंगों व फूलों से होली खेली। यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि यह मंदिर 1978 में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद पहली बार खुला है।

46 वर्षों बाद लौटी आस्था की रौनक

खग्गू सराय स्थित कर्तिकेय महादेव मंदिर, जिसे भस्मेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है, 13 दिसंबर 2024 को एक अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान प्रशासन द्वारा खोजे जाने के बाद दोबारा खोला गया था। मंदिर में भगवान शिव और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं, और इसके खुलने के बाद पहली बार यहां होली का आयोजन हुआ।

विहिप जिला अध्यक्ष आनंद अग्रवाल ने इस ऐतिहासिक क्षण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “46 वर्षों के बाद इस पावन स्थल पर रंगों की बरसात हुई है। मंदिर के खुलने के बाद यह पहला होली महोत्सव है, जिसे भक्तों ने पूरे श्रद्धा और आनंद के साथ मनाया।”

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण आयोजन

मंदिर के निकट स्थित शाही जामा मस्जिद के कारण यह क्षेत्र बीते वर्षों में विवादों का केंद्र रहा है। पिछले वर्ष 24 नवंबर को अदालत के आदेश पर मस्जिद में कराए गए सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) श्रीश चंद्र ने बताया कि आयोजन को शांतिपूर्ण बनाने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्होंने कहा, “कर्तिकेय महादेव मंदिर में होली पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में मनाई गई। श्रद्धालु बेझिझक त्योहार का आनंद ले रहे हैं। प्रशासन ने हर जरूरी कदम उठाया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।”

श्रद्धालुओं में उत्साह, पुलिस का आभार

होली महोत्सव में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं ने भी उत्साह व्यक्त किया और प्रशासन का आभार जताया। स्थानीय नागरिक प्रियांशु जैन ने कहा, “पुलिस और प्रशासन ने शानदार व्यवस्था की है, जिससे हर कोई सुरक्षित माहौल में पर्व मना रहा है। मंदिर में इस बार जो उल्लास दिखा, वह वर्षों तक याद रखा जाएगा।”

इस ऐतिहासिक आयोजन के साथ कर्तिकेय महादेव मंदिर में आस्था और परंपरा की वापसी हो गई है। मंदिर समिति का कहना है कि आने वाले वर्षों में इसे और भव्य तरीके से मनाने की योजना बनाई जाएगी।

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