नेपाल में सोशल मीडिया बैन हटा, ‘जनरेशन Z आंदोलन’ ने सरकार को झुकने पर किया मजबूर

काठमांडू। नेपाल में पिछले कई दिनों से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों और भारी जनदबाव के बीच केपी शर्मा ओली सरकार को आखिरकार सोशल मीडिया पर लगाया गया बैन वापस लेना पड़ा। सरकार ने सोमवार देर रात आपातकालीन मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह ऐलान किया।

तीन दिन पहले सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह कहकर प्रतिबंधित कर दिया था कि उन्होंने नेपाली अधिकारियों के साथ पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की। लेकिन यह कदम सरकार के लिए भारी साबित हुआ। देखते ही देखते यह विरोध देशभर में “जनरेशन Z क्रांति” के नाम से फैल गया।

20 की मौत, 300 से ज्यादा घायल

प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में छात्रों और युवाओं ने हाथों में नेपाल का झंडा और तख्तियां लेकर सड़क पर उतरकर नारेबाजी की – “भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं”

सेना की तैनाती, कर्फ्यू लागू

हिंसा बढ़ने पर सरकार को सेना तक उतारनी पड़ी। काठमांडू के केंद्रीय इलाके, भारत सीमा से सटे भैरहवा सहित दर्जनों शहरों में कर्फ्यू लगाया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार भिड़ंत हुई और कई जगहों पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी।

गृह मंत्री का इस्तीफ़ा

विरोध प्रदर्शनों के बीच गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस बीच, ओली मंत्रिमंडल की सहयोगी पार्टी नेपाली कांग्रेस के कई मंत्रियों ने भी सरकार के रुख का विरोध करते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया था।

पीएम ओली का अड़ियल रुख टूटा

प्रधानमंत्री ओली ने पहले ही बयान में प्रदर्शनकारियों को “जनरेशन Z उपद्रवी” कहकर खारिज किया था और साफ कहा था कि “चाहे मुझे प्रधानमंत्री पद से हटना पड़े, लेकिन सोशल मीडिया बैन नहीं हटेगा।” लेकिन लगातार बढ़ते दबाव, हिंसा और मंत्रियों के असहमति जताने के बाद सरकार को झुकना पड़ा और बैन हटाने का ऐलान करना पड़ा।

सिर्फ बैन नहीं, भ्रष्टाचार भी मुद्दा

हालांकि आंदोलनकारी केवल बैन हटने से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के खिलाफ एक व्यापक नागरिक अधिकार आंदोलन बन चुका है। प्रदर्शन में शामिल छात्रा सुहाना ने कहा – “यह सिर्फ सोशल मीडिया की लड़ाई नहीं है। यह उस आक्रोश की आवाज़ है जो सालों से भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी के कारण जमा हुआ है।”

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