हिड़मा का अंत: आंध्र के मारेडुमिल्ली जंगल में एनकाउंटर, नक्सल आंदोलन को बड़ा झटका
रायपुर/आंध्र प्रदेश | देश में दो दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द रहे शीर्ष नक्सल कमांडर मदवी हिड़मा का मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के मारेडुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों द्वारा एनकाउंटर में खात्मा कर दिया गया। इस ऑपरेशन में उसकी पत्नी राजे समेत कुल छह नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
चत्तीसगढ़ के बस्तर ज़ोन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इसे नक्सल मोर्चे पर “निर्णायक सफलता” और “आख़िरी बड़ा पत्थर” करार दिया। सूचनाओं के अनुसार, मारेडुमिल्ली के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की विशेष टीमों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान हिड़मा के समूह को घेरकर मुठभेड़ की।
दो दशक से नक्सलियों का ‘सबसे खतरनाक चेहरा’
सुकमा के पुर्वर्ती गांव का निवासी हिड़मा लंबे समय तक पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का मुखिया रहा, जिसे दंडकारण्य क्षेत्र की सबसे मजबूत सैन्य इकाई माना जाता है। पिछले वर्ष उसे माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति में भी शामिल किया गया था।
हिड़मा 1990 के दशक के अंत में संगठन से जुड़ा और 2010 के ताड़मेटला हमले के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आया। इस हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद 2013 में झीरम घाटी हमला और 2017 के बुरकापाल हमले समेत कई बड़ी वारदातों में उसका नाम सामने आया।
चार परतों की सुरक्षा घेरा भी नहीं बचा सका
जंगलों में हिड़मा की चार-लेयर्ड सुरक्षा व्यवस्था उसे सालों तक पकड़ से बाहर रखती थी। वह हमेशा AK-47 से लैस रहता था और उसके दस्ते के पास आधुनिक हथियार मौजूद रहते थे। उसकी पत्नी राजे भी उसी बटालियन में सक्रिय थी और कई बड़े हमलों में शामिल बताई जाती है।
लेकिन पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति और लगातार दबाव ने हिड़मा के नेटवर्क को तोड़ दिया। मजबूरन वह आंध्र-छत्तीसगढ़ सीमा के घने पहाड़ी क्षेत्रों में शरण लेकर भटकता रहा।
सरकार की प्रतिक्रिया: ‘बस्तर में शांति की ओर बड़ा कदम’
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “हमें जानकारी मिली है कि हिड़मा भी मारे गए नक्सलियों में शामिल है। यह बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण विकास है।”
अधिकारियों के अनुसार, हिड़मा की मौत इस वर्ष सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए माओवादी केंद्रीय समिति के नौवें सदस्य के रूप में दर्ज हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना नक्सल आंदोलन की शेष ताकत को झटका पहुंचाने वाली है।
नक्सल विरोधी अभियान में ‘टर्निंग पॉइंट’
हिड़मा का खात्मा उन अभियानों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है जो पिछले कुछ वर्षों से दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सल प्रभाव को खत्म करने के लिए चल रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इससे संगठन की सैन्य क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने का मार्ग और अधिक मजबूत होगा।