देश की सैन्य शक्ति का गढ़ता कर्तव्य पथ पर भव्य प्रदर्शन
77वें गणतंत्र दिवस पर ‘कार्तव्य पथ’ पर भारत ने रक्षा क्षमता का विश्वस्तर पर संदेश दिया

नई दिल्ली (विशेष समाचार) — आज 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ, नई दिल्ली में भारत की सैन्य शक्ति और उन्नत रक्षा तकनीक का अद्भुत प्रदर्शन आयोजित किया गया। समारोह में देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सलामी लीस के साथ परेड को अधिकारियों तथा विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में हरी झंडी दिखाई। शरीक मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी मौजूद रहे।

परेड का प्रारंभ और व्यापक विविधता
परेड की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के पश्चात करीब सौ कलाकारों द्वारा ‘विविधता में एकता’ थीम पर सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई, जिसमें देश की विविधता व संस्कृति का शानदार चित्रण किया गया।

रणनैतिक ‘बैटल ऐरे फॉर्मेशन’ में पहला अनुभव
इस वर्ष की परेड में पहली बार भारतीय सेना ने ‘बटाल ऐरे फॉर्मेशन’ का प्रदर्शन किया, जिसमें तैनात सैनिकों एवं उन्नत वाहनों को वास्तविक युद्ध क्रम में प्रदर्शित किया गया।

भारी शस्त्रास्त्र और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन
सबसे पहले उच्च गतिशील खुफिया वाहन व देश में निर्मित हल्का विशेषीकृत बख्तरबंद वाहन ने मार्च किया। इसके पश्चात T-90 भिष्म तथा अर्जुन मेन बैटल टैंक सलामी देने वाली डेस्क के सामने से गुजरे, जिन पर हेलीकॉप्टरों का समर्थन भी रहा। आधुनिक एपाचे AH-64E तथा स्वदेशी प्रचंड हल्के कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ने हवाई समर्थन प्रदर्शित किया।

इसके अलावा BMP-II इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल, नाग मिसाइल प्रणाली (Tracked) Mk-2 और अन्य यंत्रों ने भी परेड में हिस्सा लिया।

उन्नत और स्वदेशी हथियार प्रणालियाँ
परेड में सूर्यस्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (URLS), ब्रहमोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, तथा आकाश मिसाइल प्रणालियाँ जैसे अत्याधुनिक ओषधि प्रदर्शित की गईं, जो भारत की तकनीकी समुद्री व वायु रक्षा क्षमताओं को उजागर करती हैं।

विदेशी सेना का विशेष सहभाग
परेड में यूरोपीय संघ के सैनिकों ने भी मार्च करते हुए शिरकत की, जो किसी राष्ट्रीय परेड में यूरोपीय भागीदारी का एक अनूठा उदाहरण रहा।

यह भव्य आयोजन ना केवल भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित उन्नत हथियार प्रणालियों और बलों की संयुक्त क्षमता का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली संदेश भी रहा है।

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