‘बहाने’ ने हंसी के साथ दिया सामाजिक संदेश, पंडित-शिष्य की चालाकी पर दर्शक लोटपोट
पटना, संवाददाता।
राजधानी पटना के मातृ पितृ छाया सदन, द्वारिका नगर (रोड नंबर-2), नयाचक खेमनीचक में रविवार, 29 मार्च को नाट्य संस्था बिन्नागुरी रंग अभिलाष द्वारा हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाटक ‘बहाने’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। इस नाटक का लेखन अशोक पागल ने किया है, जबकि निर्देशन की कमान बिकेश साह ने संभाली।
नाटक का कथानक एक पंडित और उसके मूर्ख शिष्य के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें दोनों की चालाकी और परिस्थितियों से बचने के बहाने दर्शकों के सामने हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। कहानी के अनुसार, पानी न आने के कारण पंडित जी बिना स्नान किए ही पूजा कराने निकल पड़ते हैं और अपने शिष्य को सख्त हिदायत देते हैं कि इस बात का खुलासा न हो। लेकिन भोला शिष्य अपनी नादानी में बार-बार ऐसी गलतियां करता है कि पूरी स्थिति हास्यास्पद बन जाती है। मंच पर घटित घटनाओं ने दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
नाटक के जरिए समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि छोटी-छोटी चालाकियां और झूठ अंततः हास्यास्पद ही बनते हैं और सच्चाई ही सबसे बड़ी शक्ति है।
कलाकारों का सशक्त अभिनय
मंच पर पंडित जी की भूमिका में आदित्य शर्मा, भोला के किरदार में बिकेश साह, मुरली के रूप में चन्दन कुमार गुप्ता, कुन्दन/एक व्यक्ति के रूप में भृगु रंजन तथा मैडम जी के रूप में प्रेरणा प्रिया ने जीवंत अभिनय कर दर्शकों का दिल जीत लिया।

मंच के पीछे की टीम का योगदान
प्रकाश व्यवस्था का दायित्व रीतिक कुमार ने निभाया, जबकि संगीत संयोजन जिगर कुमार द्वारा किया गया। रूप सज्जा में पूजा कुमारी, परिकल्पना में बिकेश साह, सामग्री व्यवस्था में चन्दन कुमार गुप्ता और वस्त्र विन्यास में आदित्य शर्मा का विशेष योगदान रहा। आयोजन में राहुल झा, नितेश साह और रामकृष्ण मंडल का सहयोग भी सराहनीय रहा।
नाटक की सशक्त प्रस्तुति और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा और कार्यक्रम को सफल बनाया।