झारखंड की आदिवासी कार्यकर्ता निशा भगत की मौत से मचा राजनीतिक घमासान, भाजपा ने निष्पक्ष जांच की मांग की
फेसबुक लाइव के दौरान लगाए थे उत्पीड़न और जमीन माफिया से जुड़े आरोप, पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
रांची। झारखंड की आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार को रांची में उनकी मौत की खबर सामने आई। इससे कुछ समय पहले उन्होंने फेसबुक पर लाइव आकर अपनी परेशानियों और कथित उत्पीड़न को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के बाद भाजपा ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
करीब 38 वर्षीय निशा भगत आदिवासी समाज के अधिकारों और जनजातीय पहचान से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय थीं। फेसबुक लाइव के दौरान वह भावुक नजर आईं। उन्होंने कथित तौर पर जमीन से जुड़े विवाद, भू-माफिया के दबाव और सोशल मीडिया पर अपनी छवि खराब किए जाने की शिकायत की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने के बावजूद उन्हें प्रशासन से अपेक्षित मदद नहीं मिली।
पुलिस अधिकारी से बातचीत की भी जांच
बताया जा रहा है कि फेसबुक लाइव के दौरान निशा ने पिठोरिया थाना प्रभारी से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने अपनी परेशानियों का जिक्र करते हुए अपनी जान को लेकर आशंका जताई थी। उन्होंने अपने घर में हुई कथित चोरी की घटना का समाधान नहीं होने पर भी सवाल उठाए थे। पुलिस अब इस बातचीत, उनकी शिकायतों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
रांची पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों और उससे जुड़ी परिस्थितियों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांगा जवाब
इस घटना के बाद भाजपा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत की मौत पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की का नाम लेते हुए उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फेसबुक लाइव के दौरान निशा ने अपनी परेशानी जाहिर की थी, इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी जांच होनी चाहिए।
आदिवासी संगठनों में भी शोक
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी घटना पर दुख जताया और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। वहीं, आदिवासी समुदाय और सामाजिक संगठनों के बीच भी इस घटना को लेकर शोक और चिंता का माहौल है।
फिलहाल पुलिस निशा भगत के फेसबुक लाइव, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों, पुलिस से हुई बातचीत और पूर्व में दर्ज शिकायतों की पड़ताल कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।