मुंगेर
शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि संस्कारवान और नैतिक नागरिकों का निर्माण करना है। यह तभी संभव है जब शिक्षा में धर्म और अध्यात्म का समावेश हो। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के प्रति कुलपति प्रो. गणेश महतो ने मुंगेर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित सभा में इन विचारों को व्यक्त किया।

 

प्रो. महतो ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय न केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि छात्रों को योग, संगीत, खेलकूद और अन्य कलाओं में भी निपुण बनाते हैं। इससे छात्रों का सर्वांगीण विकास होता है और उन्हें नैतिकता और अनुशासन की सही दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अध्यात्म की भूमिका बिल्कुल वैसी है जैसे रेलगाड़ी के लिए पटरी का महत्व। अध्यात्म और धर्म के बिना शिक्षा दिशाहीन हो जाती है।

शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षक न केवल छात्रों को पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ रहे हैं। वंदना सभा के महत्व पर चर्चा करते हुए प्रो. महतो ने कहा कि एकाग्रचित्त होकर वंदना करने से विद्यार्थियों का मस्तिष्क तेज और स्मरण शक्ति प्रबल होती है, जिससे उनके अध्ययन में भी लाभ होता है।

अंत में, उपप्रधानाचार्य उज्ज्वल किशोर सिन्हा ने प्रो. महतो को अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। सभा में विद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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