“भवानीपुर बना ‘प्रतिष्ठा का रण’: ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी की सीधी टक्कर”

कोलकाता | TWM न्यूज़

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार भवानीपुर विधानसभा सीट सबसे अहम और चर्चित मुकाबले के रूप में उभरकर सामने आई है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और भाजपा के दिग्गज नेता Suvendu Adhikari के बीच यह सीधी टक्कर अब “प्रतिष्ठा की लड़ाई” बन चुकी है।

यह सीट लंबे समय से ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन इस बार मुकाबला सामान्य चुनावी लड़ाई से कहीं आगे निकल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संघर्ष केवल एक सीट का नहीं बल्कि राज्य की सत्ता, छवि और भविष्य की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन गया है।

भवानीपुर, जो कोलकाता नगर निगम के कई वार्डों में फैला हुआ है, सामाजिक रूप से बेहद विविध क्षेत्र है। यहां बंगाली, मारवाड़ी, गुजराती, सिख, मुस्लिम और अन्य समुदायों का मिश्रण है, जिससे चुनावी समीकरण और जटिल हो गए हैं।

टीएमसी जहां ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पकड़ और “घরের মেয়ে” (घर की बेटी) की भावनात्मक अपील पर भरोसा कर रही है, वहीं भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाकर जाति और समुदाय के समीकरणों को साधने की कोशिश तेज कर दी है।

यह मुकाबला 2021 के नंदीग्राम चुनाव की याद भी ताजा कर रहा है, जहां सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। अब वही लड़ाई भवानीपुर में एक नए रूप में सामने है।

हालिया चुनावी रुझानों से संकेत मिलते हैं कि मुकाबला पहले की तुलना में अधिक कड़ा हो गया है। 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है, जिससे इस बार का मुकाबला और रोचक बन गया है।

कुल मिलाकर, भवानीपुर अब सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं रह गई है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है—जहां से राज्य की सत्ता की दिशा और राजनीतिक संदेश तय होगा।

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