“तपन सिकदर: बंगाल में कमल की जड़ों को सींचने वाला अनसुना शिल्पकार”
विशेष टिप्पणी | TWM न्यूज़
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज भारतीय जनता पार्टी जिस मुकाम पर खड़ी है, उसकी नींव में जिन कुछ नामों की सबसे अहम भूमिका रही, उनमें Tapan Sikdar का नाम अग्रणी है। यह वह दौर था जब राज्य की राजनीति पर वामपंथ का अभेद्य किला कायम था और “कमल” का कोई ठोस अस्तित्व नहीं था। ऐसे समय में तपन सिकदर ने न सिर्फ एक सपना देखा, बल्कि उसे जमीन पर उतारने की हिम्मत भी दिखाई।
तपन सिकदर का राजनीतिक सफर किसी आलीशान दफ्तर से नहीं, बल्कि गांव-गांव की धूल भरी पगडंडियों से होकर गुजरा। कहा जाता है कि वे हजारों कार्यकर्ताओं को नाम से पहचानते थे और उन्होंने शायद ही कोई ऐसा इलाका छोड़ा हो, जहां उन्होंने कदम न रखा हो। यही जमीनी जुड़ाव उन्हें आम नेताओं से अलग बनाता है।
1998 का लोकसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। दमदम सीट से उनकी ऐतिहासिक जीत ने यह संकेत दे दिया कि पश्चिम बंगाल में वामपंथ का किला अभेद्य नहीं है। यह जीत केवल एक सीट की नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा की एंट्री थी, जिसने आगे चलकर राज्य की राजनीति को नया मोड़ दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की सरकार में दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में तपन सिकदर ने जो काम किए, उनका प्रभाव खासकर बंगाल में साफ देखा गया। दूर-दराज के इलाकों तक टेलीफोन कनेक्टिविटी पहुंचाने और संचार ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
साथ ही, वे उन शुरुआती नेताओं में थे जिन्होंने अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। शरणार्थियों के अधिकारों के लिए उनकी आवाज और “एंटी-इन्फिल्ट्रेशन” रुख ने बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया, जो आज भी प्रासंगिक है।
तपन सिकदर को अक्सर “बंगाल बीजेपी के भीष्म पितामह” के रूप में याद किया जाता है। यह उपाधि केवल सम्मान नहीं, बल्कि उनके योगदान की गहराई को दर्शाती है। उन्होंने जिस समर्पण और संघर्ष के साथ पार्टी की नींव रखी, वही आज उसकी मजबूती का आधार है।
आज जब पश्चिम बंगाल में भाजपा एक मजबूत राजनीतिक ताकत बन चुकी है, तब यह जरूरी है कि उन नेताओं को याद किया जाए जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में इस रास्ते को बनाया। तपन सिकदर केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि एक विचार, एक संघर्ष और एक विरासत थे—जिसे भुलाया नहीं जा सकता।