बिहार की सियासत पर कविता से प्रहार: “अरे ओ बुद्धिजीवी, अरे ओ बिहारी!”

पटना। बिहार की मौजूदा राजनीति, युवाओं की समस्याओं और जातिगत सम्मेलनों पर एक विचारशील कविता इन दिनों चर्चा में है। यह कविता “अरे ओ बुद्धिजीवी, अरे ओ बिहारी!” बिजनेस स्टार्टअप Growthbiz के फाउंडर अक्षय कुमार द्वारा लिखी गई है, जिसे उन्होंने TWM News के साथ साझा किया। इसमें बिहार की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर कटाक्ष किया गया है।

अक्षय कुमार ने अपनी इस कविता के माध्यम से जातिगत सम्मेलनों पर सवाल उठाए हैं और बिहार के विकास को केंद्र में रखते हुए एक नई “बिहारी जात” की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि बिहार में हर जाति का सम्मेलन होता है, लेकिन बिहार के युवाओं, शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सुधार के लिए कोई सम्मेलन नहीं होता।

कविता: “अरे ओ बुद्धिजीवी, अरे ओ बिहारी!”

जात-जात के मेले लगे, हर ओर जलसा छा गया,
तंबू, पोस्टर, मंच सजे, हर कोई नारा लगा गया।
तेली का सम्मेलन हुआ, दलित ने भी झंडा गाड़ा,
कोरी, कुर्मी, राजपूत—हर समाज ने हक़ का बिगुल मारा।
पर एक सवाल दिल में उठा, “अरे, वो जात कहाँ है?”
जो बिहार का सपना देखे, वो बिहारी जात कहाँ है?

अरे ओ बुद्धिजीवी!
तुम्हारी किताबों में बिहार महान है,
पर सड़कों पर तो लाचारी का जलसा सजा है।
BPSC की परीक्षा लीक हुई, लाठी चली, हंगामा हुआ,
सड़कों पर गूंजे नारे, पर फिर वही पुराना धंधा हुआ।

IAS लॉबी चमक रही, पर ठेके सब बाहरी को जाते,
अपने बिहार का टैलेंट मरता, और अफ़सर मलाई खाते।
अरे ओ बिहारी!
तुम्हारी मेहनत तो परदेस में बिकती है,
पर यहाँ के अफ़सरों को बस घूस की चाय प्यारी है।

सरकारी बाबू बैठे हैं, बिना घूस के काम नहीं होता,
साहब की कुर्सी चली जाए, तो विकास का पहिया रोता।
हर जात ने किया जलसा, पर ये सिस्टम का सवाल कौन उठाए?
क्यों नहीं कोई सम्मेलन बिहार को सुधारने के लिए बुलाए?

अब वक़्त है एक नई जात के उभरने का,
जो जात-पात से ऊपर उठे, बिहार को संवारने का।
जो कहे – “हम बिहारी हैं, 100 पर भारी हैं!”
जो कहे – “अब भीड़ नहीं, बदलाव चाहिए!”
जो कहे – “नौकरी, शिक्षा और तरक्की पर भी सम्मेलन चाहिए!”

अब एक हुंकार उठेगी, अब एक बिगुल बजेगा,
बिहारी जात का सम्मेलन होगा, पर बिहार को लेकर होगा!
बस पूछना है, वो बिहारी जात कहाँ है?

कविता पर सोशल मीडिया में चर्चाएं

यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, और लोग इसकी पंक्तियों को साझा कर बिहार की मौजूदा हालत पर चर्चा कर रहे हैं। युवाओं और बुद्धिजीवियों ने इसे बिहार के राजनीतिक और सामाजिक तंत्र पर एक गंभीर सवाल बताया है।

अक्षय कुमार ने इस बातचीत में होली की शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि यह त्योहार सभी को जात-पात से ऊपर उठकर एक नई सोच के साथ जोड़ने का अवसर होना चाहिए। उन्होंने बिहार के युवाओं से अपील की कि वे केवल नारे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि बदलाव लाने के लिए प्रयास करें।

 

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(TWM News के लिए विशेष रिपोर्ट।)

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