बिहार में गूंजी ‘भगवा-ए-हिन्द’ की हुंकार, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा – पहला हिंदू राज्य बनेगा बिहार
सनातन महाकुंभ में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद को दिया गया संदेश

पटना, 6 जुलाई।
गांधी मैदान शनिवार को भगवा रंग में रंग गया, जब कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने ‘सनातन महाकुंभ’ में हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बिहार को पहला ‘हिंदू राज्य’ बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा, तो इसकी शुरुआत बिहार से होगी।”

भगवान परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य आयोजन का नेतृत्व पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने किया। मंच पर संतों और धर्माचार्यों की उपस्थिति में, बाबा बागेश्वर ने जातिवाद के विरुद्ध तीखा संदेश देते हुए हिंदुओं को एकजुट रहने का आह्वान किया।

“हमें मुसलमानों या ईसाइयों से नहीं, बल्कि उन हिंदुओं से परेशानी है जो जाति के नाम पर बंटवारा करते हैं,” उन्होंने साफ कहा। शास्त्री ने जोर देकर कहा कि भारत को गजवा-ए-हिन्द नहीं, बल्कि भगवा-ए-हिन्द की दिशा में बढ़ना चाहिए।

उन्होंने मंच से कहा, “हमारी एक ही प्रार्थना है—हिंदुओं को घटने मत दो, बंटने मत दो। यदि राष्ट्रवाद नहीं बचा, तो राष्ट्रविरोधी ताकतें हावी हो जाएंगी।”

धार्मिक एकजुटता और राष्ट्र निर्माण पर फोकस
कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी अपने विचार रखे और कहा कि “बिहार की सत्ता ऐसे लोगों को नहीं सौंपी जा सकती जो सनातन मूल्यों के विरुद्ध खड़े हों।” उन्होंने हिंदुत्व के संरक्षण को राज्य की प्राथमिकता बताया।

आयोजन में दिखी अद्भुत भव्यता
पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान शनिवार को धर्म-आस्था और राष्ट्रवाद का साक्षी बना। 10 एकड़ में फैले विशाल पंडाल में करीब 50,000 श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी। वीआईपी जोन, मीडिया सेंटर, भंडारा, सेवा केंद्र और मेडिकल कैंप की सुव्यवस्था रही।

सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
राज्य प्रशासन ने सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती। RAF, STF, जिला पुलिस, महिला बल, खुफिया एजेंसियां, ट्रैफिक पुलिस समेत 2500 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। ड्रोन कैमरे और CCTV के जरिए पल-पल की निगरानी की गई। एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते भी मुस्तैद दिखे।

देशभर से जुटे संत-महात्मा और श्रद्धालु
काशी, अयोध्या, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, वृंदावन से लेकर दक्षिण भारत के प्रमुख मठों के 500 से अधिक संत इस आयोजन में शामिल हुए। श्रद्धालु बिहार के कोने-कोने के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ से पहुंचे।

राजनीतिक संदेश से भरा धार्मिक मंच
विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस आयोजन ने राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। हालांकि मंच धार्मिक था, पर इसमें आए वक्तव्यों का स्वरूप कहीं न कहीं राजनीतिक समीकरणों को भी छूता नजर आया।

 

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