संस्कृति ज्ञान परीक्षा के लिए बनेगा जनअभियान, विद्यालयों में शिक्षक संवाद व अभ्यास कक्षाएं होंगी आयोजित
दौलतपुर संकुल में हुई प्रधानाचार्यों की बैठक, छठु साह ने कहा – यह परीक्षा भारतीय मूल्यों की ओर लौटने का माध्यम है

जमालपुर | 08 जुलाई 2025
दौलतपुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में मंगलवार को दौलतपुर संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संस्कृति ज्ञान परीक्षा 2025 की व्यापक तैयारी और जनभागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर रणनीति तय की गई। संकुल प्रमुख एवं सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य छठु साह ने बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा मात्र एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा है।

छठु साह ने स्पष्ट किया कि परीक्षा को छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों तक ले जाना आवश्यक है, ताकि सामाजिक स्तर पर संस्कृति के प्रति चेतना जागृत हो। उन्होंने अधिकाधिक विद्यालयों से सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक संवाद, प्रेरक गोष्ठियां, अभ्यास कक्षाएं, सोशल मीडिया प्रचार, केबल चैनल सहयोग और डिजिटल प्रचार पर जोर दिया।

शिक्षक बनेंगे प्रेरक, स्कूलों में बनेंगी स्थानीय समितियां
बैठक में सरस्वती शिशु मंदिर, केशोपुर के प्रधानाचार्य प्रभाष कुमार ने कहा कि सभी प्रधानाचार्यों से सीधे संवाद कर परीक्षा के महत्व को रेखांकित किया जाएगा। उन्होंने डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ अभिभावक संवाद को भी अहम बताया। वहीं, फुलका विद्यालय के प्रधानाचार्य दिनेश कुमार ने परीक्षा की तिथि, पाठ्यवस्तु और पुरस्कारों की स्पष्ट जानकारी समय रहते प्रचारित करने की आवश्यकता जताई।

इन्द्ररुख विद्यालय के प्रधानाचार्य साकेत कुमार ने सुझाव दिया कि शिक्षक ही इस अभियान के असली वाहक हैं। अतः प्रत्येक विद्यालय में शिक्षकों की विशेष बैठकें कर उन्हें विद्यार्थियों को परीक्षा में भाग लेने हेतु प्रेरित करने के लिए निर्देशित किया जाए। सफियाबाद विद्यालय के प्रभारी शशिकांत सिंह ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में एक स्थानीय कार्यसमिति गठित की जाए, जो पंजीकरण प्रक्रिया से लेकर आयोजन तक सभी जिम्मेदारियों को समयबद्ध रूप से पूरा करे।

छात्राओं की भागीदारी के लिए विशेष प्रयास
सरस्वती शिशु मंदिर, मुंगेरपथ की प्रधानाचार्या किरण कुमारी ने छात्राओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु अलग से काउंसलिंग सत्र तथा अभिभावकों से संवाद की बात कही। उन्होंने कहा कि घर का सहयोग मिलने पर छात्राएं आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में भाग लेंगी।

नियमित समीक्षा और समर्पित अभियान का निर्णय
बैठक के समापन पर यह तय किया गया कि आगामी दिनों में नियमित रूप से समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही, एक निश्चित लक्ष्य तय कर हर विद्यालय में विद्यार्थियों को संस्कृति ज्ञान परीक्षा से जोड़ने का समर्पित अभियान चलाया जाएगा।

इस अवसर पर सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और आयोजक समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार संस्कृति ज्ञान परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास बनेगी।

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