स्पेशल ऑप्स 2 में लौटे ‘हिम्मत सिंह’, साइबर युद्ध की नई पटकथा लेकर
काय के मेनन की दमदार वापसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बना नया दुश्मन

एंटरटेनमेंट डेस्क, 
लंबे इंतज़ार के बाद नीरज पांडे की चर्चित जासूसी वेब सीरीज़ स्पेशल ऑप्स का दूसरा सीज़न डिज़्नी+हॉटस्टार पर रिलीज़ हो चुका है। इस बार जासूसी का मैदान बदल गया है—लड़ाई अब डिजिटल दुनिया में लड़ी जा रही है। देश के डिजिटल सिस्टम, खासकर यूपीआई नेटवर्क पर संभावित साइबर हमले की पृष्ठभूमि में रचा गया यह थ्रिलर, दर्शकों को एक नई तरह की जासूसी यात्रा पर ले जाता है।

सीरीज़ में एक बार फिर हिम्मत सिंह की भूमिका में काय के मेनन अपने संयमित और सूक्ष्म अभिनय से दर्शकों को बांध लेते हैं। कहानी की शुरुआत होती है जब एआई विशेषज्ञ और साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट डॉ. पीयूष भार्गव (आरिफ ज़कारिया) को एक अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान अगवा कर लिया जाता है। डॉ. भार्गव की जान खतरे में है, और अगर समय रहते उन्हें नहीं बचाया गया तो पूरा देश डिजिटल अंधकार में डूब सकता है।

इस मिशन पर निकलते हैं हिम्मत सिंह और उनकी टीम, जिसमें करण टैकर, मुझम्मिल इब्राहिम, सैयामी खेर और विनय पाठक जैसे पुराने चेहरे शामिल हैं। इस बार साथ में हैं प्रकाश राज और खलनायक के रूप में नजर आने वाले ताहिर राज भसीन, जो ‘कलेक्टर’ के नाम से एक रहस्यमयी और बौद्धिक अपराधी की भूमिका में डर पैदा करते हैं।

नीरज पांडे के निर्देशन में बनी यह सीरीज़ इस बार ‘इंडो-पाक’ विवाद से हटकर साइबर आतंकवाद को मुख्य विषय बनाती है। यह सिर्फ एक मिशन नहीं है, यह हिम्मत सिंह की निजी जद्दोजहद और भावनात्मक द्वंद्व की कहानी भी है। सीरीज़ भारत के साथ-साथ तुर्की, जॉर्जिया और हंगरी में फिल्माई गई है, और इसका विजुअल ट्रीटमेंट शानदार है। बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी के तनाव और गहराई को बख़ूबी उभारता है।

क्या काम करता है:

  • काय के मेनन का प्रभावशाली अभिनय
  • यथार्थवादी जासूसी प्रस्तुतिकरण
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर क्राइम जैसा सामयिक विषय
  • पात्रों की गहराई और ग्रोथ

क्या खटकता है:

  • कहानी की गति कुछ जगह धीमी पड़ती है
  • कुछ दृश्य रोमांच का स्तर नहीं छू पाते
  • ‘स्लो बर्न’ शैली हर दर्शक के लिए नहीं है
  • प्रकाश राज का किरदार “अ वेडनेसडे” के आम आदमी जैसा प्रतीत होता है, पर प्रभावहीन लगता है

फिर भी, सीरीज़ में कुछ ऐसे मोड़ आते हैं जो चौंकाते हैं—जैसे एक ऐसे पात्र का विश्वासघात जिससे उम्मीद नहीं थी। और क्लाइमैक्स में हिम्मत सिंह की जीत दर्शकों के चेहरे पर गर्व भर देता है।

फैसला:
स्पेशल ऑप्स 2 एक परिपक्व और विचारोत्तेजक थ्रिलर है, जो तेज़ गति की अपेक्षा गहराई और विषय की गंभीरता को तरजीह देता है। हिम्मत सिंह के साथ यह लड़ाई खत्म नहीं हुई है—दर्शकों को अब सीज़न 3 का इंतज़ार रहेगा।

रेटिंग: ⭐⭐⭐🌗 (3.5/5)

 

अमर शर्मा

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