“दोस्ती महंगी पड़ गई”: कांग्रेस ने मोदी-ट्रंप रिश्ते पर कसा तंज, पूछा— अब क्या कहेंगे प्रधानमंत्री?
नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को रूसी तेल खरीद पर चेतावनी देने और व्यापार शुल्क बढ़ाने की धमकी देने के बाद, देश की विदेश नीति पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के ‘खास रिश्ते’ पर करारा हमला बोला है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तीखा तंज कसते हुए कहा— “दोस्त, दोस्त ना रहा… ट्रंप यार, अब तुझ पर ऐतबार ना रहा!”
‘फोटोशूट की दोस्ती’ महंगी साबित हुई: कांग्रेस
मंगलवार को प्रेस वार्ता में जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती की खूब चर्चाएं हुईं। ‘हाउडी मोदी’, ‘नमस्ते ट्रंप’ और ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ जैसे आयोजन किए गए। लेकिन अब वही ट्रंप भारत को धमकी दे रहे हैं। यह दोस्ती भारत के लिए महंगी साबित हुई है। प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ जो ‘विशेष रिश्ता’ बताया था, अब उसी रिश्ते के चलते भारत को अमेरिकी व्यापार नीतियों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। रमेश ने आरोप लगाया कि यह ‘विदेश नीति नहीं, बल्कि इवेंट मैनेजमेंट’ है, जिसका नतीजा अब देश भुगत रहा है।
ट्रंप की तीखी भाषा, भारत पर ‘युद्ध फंडिंग’ का आरोप
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की और चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो और भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ट्रंप ने यहां तक कह डाला कि “भारतीय अर्थव्यवस्था मृतप्राय है और भारत रूस के युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंड कर रहा है।”
विदेश मंत्रालय का पलटवार— अमेरिका का रुख ‘पाखंडी’
भारत के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देशों का यह रवैया ‘अनुचित और पाखंडी’ है। मंत्रालय ने दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्वतंत्र है और पश्चिमी देश स्वयं भी रूस से व्यापार कर रहे हैं।
‘CAP’ बन रहा है नया खतरा
रमेश ने कहा कि भारत के सामने अब एक नया रणनीतिक खतरा खड़ा हो रहा है, जिसे उन्होंने ‘CAP’ यानी चीन, अमेरिका और पाकिस्तान के गठजोड़ के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने दावा किया कि विदेश मंत्रालय की सफाई के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों में दरार साफ दिख रही है।
उन्होंने ट्रंप के उन पुराने बयानों का भी जिक्र किया जिनमें ट्रंप ने खुद को भारत-पाकिस्तान के बीच ’32-33 बार’ मध्यस्थ बताया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।