राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला : “कर्नाटक में 1 लाख से अधिक फर्जी वोट, ये ‘भयंकर चोरी’ है”
कांग्रेस का दावा – महादेवपुरा विधानसभा में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी, बीजेपी से मिलीभगत का आरोप
नई दिल्ली / बेंगलुरु।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग (EC) को कठघरे में खड़ा करते हुए कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में “भयंकर वोट चोरी” का सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने का काम किया, जिससे 2024 के लोकसभा चुनावों में व्यापक स्तर पर धांधली हुई।
गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा, “हमारे पास 100% सबूत हैं कि किस प्रकार महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा डुप्लिकेट वोटर, गलत पते और समूह में वोट डालने वाले नाम जोड़े गए। यह एक संगठित चुनावी चोरी है।”
राहुल गांधी ने बताया कि यह जानकारी कांग्रेस पार्टी की आंतरिक जांच से सामने आई है, जो छह महीनों तक चली। इस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वोटर लिस्टों को जानबूझकर ऐसे स्वरूप में दिया गया है, जिससे मशीन से पढ़ा न जा सके।
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग हमें सात फीट लंबा कागज देता है, जो मशीन-रीडेबल नहीं होता। यदि हमें वही सूची इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में दी जाती, तो 30 सेकंड में ही यह धोखाधड़ी उजागर हो सकती थी। पर आयोग का उद्देश्य ही यही है – डेटा को विश्लेषण से दूर रखना।”
बेंगलुरु सेंट्रल में मामूली अंतर से बीजेपी की जीत पर उठाए सवाल
महादेवपुरा वही विधानसभा क्षेत्र है, जो बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। यहां कांग्रेस के उम्मीदवार मंसूर अली खान काफी देर तक बढ़त में थे, लेकिन अंततः बीजेपी के पीसी मोहन ने मात्र 32,707 वोटों से जीत दर्ज की। राहुल गांधी का कहना है कि यदि यह ‘फर्जी वोट’ नहीं होते, तो परिणाम कुछ और होता।
“चुनाव आयोग का रवैया संदिग्ध”
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि जब टेक्नोलॉजी के दौर में हर चीज डिजिटल हो चुकी है, तो मतदाता सूची आज भी कागज पर ही क्यों दी जाती है। उन्होंने कहा, “यह सब जानबूझकर किया गया है ताकि हम गड़बड़ियों को पकड़ न सकें।”
कांग्रेस निकालेगी विरोध मार्च
इन आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। खुद राहुल गांधी इस मार्च का नेतृत्व करेंगे।
बीजेपी और आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
वहीं, इस मामले पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राहुल गांधी के इस हमले ने सियासी पारा चढ़ा दिया है और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।