सासाराम की रैली में लालू का जलवा: एक मिनट के भाषण ने खींची जनता की धड़कनें

सासाराम।
कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार रैली’ रविवार को सासाराम में राजनीतिक ऊर्जा और उत्साह का बड़ा मंच बनी। मंच पर मौजूद तमाम नेताओं के बीच सबसे ज़्यादा चर्चा का केंद्र रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, जिन्होंने अपने पुराने अंदाज़ और चुटीली बोली से पलों में ही रैली का रंग बदल दिया।

जैसे ही लालू यादव ने माइक थामा, भीड़ में शोर गूंज उठा। उन्होंने व्यंग्य और जनभाषा के संगम में अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा – “चोरों को हटाइए, बीजेपी को भगाइए, सब मिलकर लोकतंत्र को बचाइए।” और फिर अचानक उनकी ज़ुबान से निकला लोकगीत जैसा वाक्य— “लागल-लागल झुलनियां में धक्का, बलम कलकत्ता चला।” यह सुनते ही सभा स्थल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।

लालू के इस छोटे से भाषण का असर इतना गहरा था कि मंच पर बैठे राहुल गांधी और तेजस्वी यादव भी मुस्कुराए बिना न रह सके। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत तमाम नेता उस पल में लालू की सहज शैली के कायल दिखे।

जनता से सीधा जुड़ाव, विपक्ष को तीखा संदेश

लालू यादव ने चुटीले अंदाज़ में केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा किसी भी कीमत पर सत्ता में वापस न आए, इसके लिए विपक्षी दलों को एकजुट रहना होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के साथ मिलकर लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़नी होगी।

भावुक हुए तेजस्वी, खुश दिखे राहुल

तेजस्वी यादव के लिए यह क्षण भावुकता से भरा रहा। वे मंच पर अपने पिता को उसी पुराने जोश और उत्साह के साथ देख रहे थे, जिसने कभी बिहार की राजनीति को अपनी मुट्ठी में कर रखा था। वहीं राहुल गांधी का मुस्कुराता चेहरा साफ संकेत दे रहा था कि लालू की शैली ने सभा में एक अलग ही ऊर्जा भर दी है।

लालू स्टाइल की राजनीति अब भी ज़िंदा

सासाराम की इस सभा ने साबित कर दिया कि बिहार की राजनीति में चाहे नए चेहरे उभरें, लेकिन लालू यादव का अंदाज़ अब भी भीड़ को खींचने और दिशा देने में सक्षम है। उनके एक मिनट के भाषण ने महागठबंधन की एकता को तो मज़बूत किया ही, साथ ही आने वाले चुनावों के लिए उत्साह का माहौल भी बना दिया

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