अनुच्छेद 67(क) के तहत जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का हवाला
राज्यसभा की बागडोर अब उपसभापति हरिवंश के हाथों में, 60 दिनों में होगा नया चुनाव
नई दिल्ली। संवाददाता।
देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार की शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर इस्तीफा सौंपा, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत पद छोड़ने की घोषणा की।
धनखड़ ने लिखा, “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं, जो संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अंतर्गत है।” इस्तीफे की घोषणा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन की गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
क्या कहता है अनुच्छेद 67(क)?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 67(क) उपराष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षरयुक्त पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित कर कभी भी पद छोड़ने की अनुमति देता है। इस प्रावधान के तहत इस्तीफा वैध होता है और उपराष्ट्रपति का पद तत्काल प्रभाव से रिक्त हो जाता है।
संविधान यह भी कहता है कि यदि किसी कारणवश—जैसे इस्तीफा, मृत्यु, पद से हटाया जाना या अन्य कारणों से—यह पद रिक्त हो जाता है, तो उस रिक्ति को भरने के लिए यथाशीघ्र चुनाव कराए जाने चाहिए।
अब आगे क्या?
धनखड़ के इस्तीफे के बाद राज्यसभा का कार्यभार फिलहाल उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह संभालेंगे, जब तक कि नया उपराष्ट्रपति नहीं चुन लिया जाता। चुनाव आयोग द्वारा जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी।
संविधान के अनुसार, इस्तीफे या पद रिक्त होने की स्थिति में 60 दिनों के भीतर उपराष्ट्रपति का चुनाव कराना अनिवार्य होता है। ऐसे में 21 जुलाई को इस्तीफा दिए जाने के बाद चुनाव की अंतिम तिथि 19 सितंबर तक हो सकती है।
उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है?
उपराष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता नहीं करती, बल्कि यह परोक्ष चुनाव होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य मिलकर एक निर्वाचक मंडल का गठन करते हैं, जो उपराष्ट्रपति का चुनाव करता है।
एक बार निर्वाचित होने के बाद उपराष्ट्रपति पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा करते हैं, लेकिन नए उपराष्ट्रपति के पदभार संभालने तक वह पद पर बने रह सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कोई भी व्यक्ति कितनी भी बार इस पद के लिए पुनः निर्वाचित हो सकता है।
राजनीति में हलचल
धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब मानसून सत्र की शुरुआत के साथ विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। उनके इस्तीफे ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की घोषणा और अगले उपराष्ट्रपति के चयन पर टिकी हैं।
(रिपोर्ट: टीडब्लूएम न्यूज ब्यूरो, नई दिल्ली)