भारत-सिंगापुर व्यापार समझौतों की समीक्षा पर सहमति, सहयोग के नए आयाम खुलेंगे

नई दिल्ली। भारत और सिंगापुर ने आर्थिक संबंधों को और मज़बूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA) और आसियान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन समझौतों की समयबद्ध समीक्षा से आपसी व्यापार को नई गति मिलेगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के विभिन्न राज्य इस साझेदारी के अहम स्तंभ होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल के महीनों में सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम ने ओडिशा का दौरा किया था और आंध्र प्रदेश, असम, तेलंगाना एवं ओडिशा के मुख्यमंत्री भी सिंगापुर गए थे।

कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चेन्नई में ‘नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग’ की स्थापना सिंगापुर के निवेश से हो रही है, जो भारत की भावी कार्यबल को उन्नत विनिर्माण तकनीकों के लिए तैयार करेगा।

उन्होंने गुजरात के गिफ्ट सिटी को भारत-सिंगापुर के बीच वित्तीय बाज़ारों की नई कड़ी बताते हुए कहा कि इससे पूंजी और निवेश प्रवाह में और वृद्धि होगी। साथ ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हुए समझौते को भी उन्होंने विशेष महत्व दिया।

समुद्री क्षेत्र में सहयोग पर भी दोनों देशों ने जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ग्रीन और डिजिटल शिपिंग कॉरिडोर’ समझौते की जानकारी दी, जिसके तहत डिजिटल पोर्ट क्लियरेंस और हरित ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूती मिलेगी। उन्होंने मुंबई में सिंगापुर की कंपनी पीएसए इंटरनेशनल द्वारा विकसित इंडिया मुंबई कंटेनर टर्मिनल फेज-II का उद्घाटन होने पर संतोष जताया और कहा कि इससे भारत की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता में बड़ा इज़ाफा होगा।

प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि सिंगापुर भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा, “भारत और सिंगापुर मिलकर आसियान देशों के साथ शांति, स्थिरता और समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ाते रहेंगे। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण हमारे संबंधों को और प्रगाढ़ बनाएगा।”


 

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