20 मार्च – भारतीय सिनेमा में अपने विदेशी चेहरे और दमदार व्यक्तित्व के कारण खलनायक की पहचान बना चुके बॉब क्रिस्टो का 20 मार्च 2011 को बेंगलुरु में निधन हो गया। 72 वर्षीय बॉब का श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी मौत का कारण “बाएं वेंट्रिकल वॉल्व का फट जाना” था।

ऑस्ट्रेलिया में जन्म, भारत में घर
1938 में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में जन्मे रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो के पिता ग्रीक मूल के थे, जबकि मां जर्मन थीं। बचपन में उनका परिवार जर्मनी चला गया, जहां उन्होंने थिएटर में रुचि दिखाई। 16 साल की उम्र में उन्होंने डसेलडॉर्फ नेशनल थिएटर में एक जूनियर कलाकार के रूप में काम किया। बाद में ऑस्ट्रेलिया लौटकर उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वियतनाम युद्ध के दौरान ऑस्ट्रेलियाई सेना में भी सेवा दी।

बॉब ने एपोकलिप्स नाउ (1979) जैसी हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया, जहां उन्होंने जंगल पैलेस के निर्माण में योगदान दिया। हालांकि, उनका फिल्मी सफर असली मायनों में तब शुरू हुआ जब वह भारत पहुंचे।

परवीन बाबी से दोस्ती और बॉलीवुड में एंट्री
बॉब क्रिस्टो मूल रूप से खाड़ी देशों में नौकरी के लिए वर्क परमिट का इंतजार कर रहे थे। इस बीच, परवीन बाबी के प्रशंसक होने के नाते वह भारत पहुंचे। मुंबई में वह फिल्म द बर्निंग ट्रेन के सेट पर परवीन बाबी से मिले। उनकी सादगी और मिलनसार स्वभाव ने परवीन को प्रभावित किया और दोनों की गहरी दोस्ती हो गई। परवीन बाबी ने ही उन्हें संजय खान से मिलवाया, जिन्होंने उन्हें अब्दुल्ला (1980) में मौका दिया।

हालांकि, बॉब की पहली रिलीज़ फिल्म फिरोज खान की क़ुर्बानी (1980) थी, जिसमें उनकी खलनायक की भूमिका को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद वह लगातार भारतीय सिनेमा का हिस्सा बने रहे।

200 से अधिक फिल्मों में किया काम
बॉब क्रिस्टो ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में 200 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में कालिया (1981), डिस्को डांसर (1982), नमक हलाल (1982), मर्द (1985), मिस्टर इंडिया (1987), अग्निपथ (1990), रूप की रानी चोरों का राजा (1993) और गुमराह (1993) शामिल हैं।

बॉब ने कई बार अंग्रेज जनरल, स्मगलर, विदेशी खलनायक और गुंडे की भूमिकाएं निभाईं। उनका भारी-भरकम शरीर, कठोर चेहरे के भाव और गहरी आवाज़ उन्हें इस छवि में फिट बैठाती थी।

अभिनय से संन्यास और आध्यात्म की राह
सिनेमा से दूर होने के बाद बॉब योग और आध्यात्म की ओर मुड़ गए। उन्होंने अपनी आत्मकथा “फ्लैशबैक: माय लाइफ एंड टाइम्स इन बॉलीवुड एंड बियॉन्ड” (2011) में अपने फिल्मी सफर और जीवन के अनुभव साझा किए।

व्यक्तिगत जीवन में भी उतार-चढ़ाव
बॉब क्रिस्टो का व्यक्तिगत जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनकी पहली पत्नी हेल्गा का एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। बाद में उन्होंने भारतीय महिला नर्गिस से विवाह किया, जिनसे उनके दो बेटे – दारियस और सुनील हुए। अपने अंतिम दिनों में वह बेंगलुरु में परिवार के साथ रहते थे।

बॉब क्रिस्टो भले ही दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी दमदार खलनायक छवि और फिल्मों में उनकी उपस्थिति दर्शकों के जेहन में हमेशा अमर रहेगी।

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