एडगर जी. उल्मर की फिल्म ‘डिटौर’ (1945) और फिल्म नॉयर का दर्शन
जब ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा के इतिहास की बात होती है, तो एडगर जी. उल्मर की फिल्म ‘डिटौर’ (1945) का नाम अनजाने में छूट जाता है। लेकिन इस फिल्म ने जिस सीमित बजट और समय में सिनेमा के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी है, वह अविश्वसनीय है। फिल्म की कहानी, पात्रों की नकारात्मकता और भाग्य की क्रूरता, इसे एक अलग स्तर पर ले जाती है।
तीन दिन में बनी, लेकिन अमर कृति बनी
महज तीन दिनों में शूट हुई इस फिल्म को ‘फिल्म नॉयर’ शैली का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। फिल्म की कहानी न्यूयॉर्क के एक पियानोवादक, अल रॉबर्ट्स (टॉम नील) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी प्रेमिका से मिलने कैलिफ़ोर्निया जा रहा होता है। लेकिन यात्रा के दौरान कई अप्रत्याशित घटनाएं और मौतें उसकी जिंदगी को एक अंधेरे मोड़ पर ले जाती हैं। आलोचक इसे न केवल फिल्म नॉयर शैली की सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानते हैं, बल्कि इसे भाग्यवाद और मानव असहायता का प्रतीक भी बताते हैं।
फ्रांसीसी फिल्म समीक्षकों की प्रशंसा
अमेरिका में भले ही उल्मर का नाम अनसुना रहा हो, लेकिन फ्रांस में फ्रांसुआ त्रुफो और जीन-लुक गोडार्ड जैसे फिल्म समीक्षकों ने उल्मर को ‘हॉलीवुड का भूला-बिसरा मास्टर’ करार दिया। ‘डिटौर’ की तुलना अल्बर्ट कामू के उपन्यास द स्ट्रेंजर से की जाती है। दोनों में ही भाग्य और मौत की अनिवार्यता का दर्शन झलकता है।
जर्मन एक्सप्रेशनिज्म से हॉलीवुड तक का सफर
एडगर उल्मर का सिनेमा की दुनिया में सफर जर्मन एक्सप्रेशनिस्ट फिल्मों से शुरू हुआ। ‘द कैबिनेट ऑफ डॉ. कैलिगारी’, ‘मेट्रोपोलिस’ और ‘एम’ जैसी फिल्मों में सेट डिज़ाइन का अनुभव लेकर वे हॉलीवुड पहुंचे। वहां, उन्होंने बिली वाइल्डर और विलियम वायलर जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया। लेकिन सीमित संसाधनों में बड़े काम करने की उनकी कला ने उन्हें ‘पॉवर्टी रो’ फिल्मकार के रूप में ख्याति दिलाई।
कोएन ब्रदर्स की श्रद्धांजलि
कोएन ब्रदर्स, जो अपने नॉयर-प्रेरित सिनेमा के लिए जाने जाते हैं, ने भी ‘डिटौर’ को अपनी प्रेरणा बताया है। उनकी डेब्यू फिल्म ‘ब्लड सिंपल’ में ‘डिटौर’ की झलक साफ देखी जा सकती है।
सिनेमा के छात्रों के लिए सीखने योग्य फिल्म
‘डिटौर’ न केवल सिनेमा प्रेमियों के लिए, बल्कि फिल्म निर्माण के छात्रों के लिए भी एक पाठ है कि कैसे सीमित संसाधनों में भी बेहतरीन कला का निर्माण किया जा सकता है। आज, ‘डिटौर’ को फिल्म नॉयर शैली की सबसे गहरी और महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है।
अगर आप इस सिनेमाई कृति को अभी तक नहीं देख पाए हैं, तो अब समय है। एडगर जी. उल्मर की यह फिल्म भाग्य और मानव मनोविज्ञान की अनदेखी गहराइयों में झांकने का मौका देती है।