धनबाद में अंधविश्वास पर तीखा प्रहार: ‘काले घोड़े की नाल’ ने समाज को दिखाया आइना

धनबाद।
संस्था के अस्थाना दिवस के अवसर पर मंगलवार की शाम झारखंड के धनबाद स्थित सराक प्लेस, महूदा में रनार्ट फाउंडेशन, पटना की ओर से चर्चित नाटक ‘काले घोड़े की नाल’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का लेखन वरिष्ठ नाटककार के. एम. मिश्रा ने किया, जबकि इसका सशक्त निर्देशन रणधीर कुमार के हाथों हुआ।

यह नाटक सामाजिक व्यंग्य और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को केंद्र में रखता है। कहानी एक सीधे-सादे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए एक ढोंगी के बहकावे में आ जाता है। ‘काले घोड़े की नाल’ जैसे अंधविश्वासी प्रतीकों पर भरोसा करते हुए वह ऐसे शॉर्टकट रास्तों को अपनाता है, जो अंततः उसे मुसीबतों के दलदल और जेल की दहलीज तक पहुँचा देते हैं। हालांकि नाटक के अंत में भ्रम का पर्दाफाश होता है और सच्चाई सामने आती है।

मंचन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि समाज में मौजूद कुछ चालाक लोग अंधविश्वास और जादू-टोने के सहारे भोले और परेशान लोगों का शोषण करते हैं। धन, नौकरी, स्वास्थ्य और रिश्तों का झूठा सपना दिखाकर वे लोगों को मेहनत से दूर और भ्रम की दुनिया में धकेल देते हैं। नाटक यह भी रेखांकित करता है कि अंधविश्वास न केवल व्यक्ति को आर्थिक रूप से कमजोर करता है, बल्कि उसके आत्मसम्मान और विवेक को भी खत्म कर देता है।

कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावी संवादों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान चमत्कार या शॉर्टकट में नहीं, बल्कि समझ, श्रम और सही निर्णय में छिपा होता है।

नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों में अंकिता वर्मा, रानी कुमारी, नंदन राज, शिव सिंह, जयंत कुमार, अजय कुमार, राजू राम, आयुष राज सिन्हा, रणवीर कुमार, सन्नी साहित्य, आशीष रंजन, रौशन कुमार, चंदू कुमारी, फेकनी देवी, करमू पासवान, राकेश कुमार और सिद्धार्थ कुमार शामिल रहे।

दर्शकों ने नाटक को खूब सराहा और इसे सामाजिक चेतना जगाने वाला प्रभावी मंचन बताया।

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