जमालपुर

जमालपुर नगर परिषद क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे शहरवासियों को गंभीर पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद के अधीन 22 वार्डों में पानी की आपूर्ति बबुआ घाट से बियाडा स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा होती है। लेकिन 600 एमएम की प्रमुख पाइपलाइन, जो सफियाबाद के पास रेलवे ट्रैक के किनारे से गुजरती है, फट जाने के कारण आपूर्ति बाधित हो गई है।

शहर के विभिन्न हिस्सों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं नगर परिषद की लापरवाही से जल संकट गहराता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि तीन दिन बीत जाने के बाद भी नगर परिषद की ओर से पाइपलाइन की मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई क्षेत्रों में पानी के बिना हाहाकार मच गया है और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

अधिकारियों की उदासीनता पर सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब नगर परिषद की लापरवाही सामने आई है। इससे पहले भी जुलाई और अगस्त महीने में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर नगर परिषद पर गंभीर आरोप लगे थे। वार्ड पार्षद साईं शंकर ने कई बार नगर परिषद के अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया था, जिसके बाद ट्रीटमेंट प्लांट में कुछ मरम्मत कार्य कराए गए थे। हालांकि, नियमित मरम्मत और देखभाल न होने के कारण जल संकट की समस्या बनी हुई है।

साईं शंकर ने कहा, “भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सभी को स्वच्छ पानी का अधिकार है, लेकिन नगर परिषद की लापरवाही से नागरिक इस अधिकार से वंचित हो रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द ही स्थानीय विधायक डॉ. अजय कुमार सिंह से मिलकर इस मामले को नगर विकास एवं आवास मंत्री नितिन नवीन के समक्ष उठाएंगे।

लीकेज की समस्या बनी रही

इसके अलावा, कई वार्डों में पानी की पाइपलाइन में लीकेज होने की समस्या भी महीनों से बनी हुई है, जिससे कीमती शुद्ध जल की बर्बादी हो रही है। नगर परिषद द्वारा इस ओर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। शहर के निवासियों ने नगर परिषद से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है ताकि जल आपूर्ति बहाल हो सके और वे इस परेशानी से उबर सकें।

जल्द कार्रवाई की मांग

शहर के नागरिकों का कहना है कि अगर जल्द ही पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई और लीकेज की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। जल संकट के इस गंभीर हालात ने नगर परिषद की कार्यक्षमता पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

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