काली पहाड़ी मंदिर तक सड़क व सीढ़ी निर्माण की मांग तेज़, सपा अध्यक्ष ने पीएम ट्रस्ट व डीएम को लिखा पत्र
— पौराणिक धरोहरों की उपेक्षा पर जताई नाराज़गी, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु अविलंब कार्य शुरू करने की मांग
मुंगेर।
जमालपुर की पौराणिक काली पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक काली मंदिर की उपेक्षा को लेकर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा के मुंगेर जिला अध्यक्ष पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री धार्मिक न्यास परिषद एवं जिलाधिकारी को पत्र लिखते हुए श्रद्धा और आस्था के इस महाकेंद्र के संरक्षण की मांग की है।
सपा अध्यक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि महाभारत कालीन माने जाने वाले इस काली मंदिर तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत जर्जर स्थिति में है। लगभग 350 फीट की ऊंचाई पर स्थित मंदिर तक न तो समुचित सड़क बनी है और न ही सीढ़ियों की स्थिति सुरक्षित कही जा सकती है। श्रद्धालुओं को हर बार कठिनाई का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
पप्पू यादव ने लिखा कि मौजूदा केंद्र सरकार खुद को हिंदुत्व और धार्मिक विरासत की रक्षक बताती है, लेकिन काली पहाड़ी जैसे महत्त्वपूर्ण स्थल की बदहाल स्थिति इस दावे को सवालों के घेरे में लाती है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक न्यास परिषद जैसी संस्था का इस मंदिर की ओर कोई ध्यान न देना आश्चर्यजनक है।

उन्होंने नगर परिषद जमालपुर पर भी तंज कसते हुए कहा कि छठ पर्व के समय लाखों रुपये की सजावट कर तात्कालिक वाहवाही लूटी जाती है, लेकिन स्थायी सुधार की दिशा में कोई पहल नहीं होती। कभी नौका विहार, तो कभी पौधारोपण जैसी योजनाओं की औपचारिक घोषणाएं तो की जाती हैं, पर असल ज़रूरत—सीढ़ी और सड़क निर्माण को अनदेखा कर दिया जाता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब भी स्थानीय श्रद्धालु या संगठन इस दिशा में कोई प्रयास करते हैं, तो मामला वन विभाग, रेल विभाग या बिहार सरकार के आपसी टकराव में उलझ कर रह जाता है। इस प्रशासनिक उलझन का खामियाजा श्रद्धालुओं और स्थानीय जनता को भुगतना पड़ता है।
सपा ने प्रशासन से मांग की है कि अविलंब सीढ़ियों और संपर्क मार्ग का निर्माण कर काली पहाड़ी मंदिर को सुलभ बनाया जाए और वहां धर्मशाला जैसी बुनियादी सुविधाएं स्थापित की जाएं। साथ ही इस ऐतिहासिक धरोहर की पहचान को संरक्षित करते हुए इसे आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
स्थानीय लोगों में इस विषय को लेकर भारी रोष है, और वे अब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।