लद्दाख हिंसा के बाद सोनम वांगचुक पर NSA में गिरफ्तारी

छठी अनुसूची व राज्य का दर्जा दिलाने की मांग पर भड़की आग, केंद्र-प्रदेश प्रशासन ने लगाया भड़काने का आरोप

लेह।
लद्दाख में हालिया हिंसा के बाद प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। दो दिन पहले भड़की हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 90 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक ने अपने भाषणों और अनशन के दौरान दिए गए बयानों से भीड़ को भड़काया।

वांगचुक बीते 10 सितंबर से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। हालांकि 15 दिन बाद 24 सितंबर को उन्होंने अनशन समाप्त कर दिया था, लेकिन इस बीच हिंसक झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए। प्रशासन का दावा है कि उनके ‘अरब स्प्रिंग’ और पड़ोसी देशों में हुई युवाओं की आंदोलनों जैसी टिप्पणियों ने प्रदर्शनकारियों को भड़काया।

गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले गृह मंत्रालय ने वांगचुक की संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था। केंद्र का कहना है कि संस्था ने एफसीआरए नियमों का उल्लंघन किया है।

2018 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित वांगचुक ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा था कि “अगर मेरी गिरफ्तारी इस संघर्ष का हिस्सा है तो मैं इसके लिए भी तैयार हूं।”

इस पूरे घटनाक्रम पर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस पार्षद फुंतसोग स्टांजिन त्सेपग पर आरोप लगाया कि वे हथियार के साथ भीड़ को उकसाते हुए सरकारी संपत्ति और भाजपा कार्यालयों पर हमलों में शामिल थे। वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को नकारते हुए न्यायिक जांच की मांग की है और कहा कि सरकार असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश कर रही है।

लद्दाख में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी है। हालांकि स्थानीय संगठनों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण था और हिंसा की जिम्मेदारी सरकार पर है।


 

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