लालू की बेटी रोहिणी का बड़ा ऐलान: राजनीति और परिवार से नाता तोड़ा, RJD में मचा हड़कंप

पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के 24 घंटे बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर की खामोश हलचल अचानक उस वक्त तेज हो गई जब पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने शनिवार को राजनीति और परिवार—दोनों से दूरी बनाने का चौंकाने वाला ऐलान कर दिया।

रोहिणी आचार्या ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक रहस्यमय पोस्ट डालते हुए लिखा कि वह “राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से नाता तोड़ रही हैं।” इस पोस्ट ने न सिर्फ RJD खेमे में हलचल बढ़ा दी बल्कि परिवार के अंदर चल रहे तनाव पर भी कई सवाल खड़े कर दिए।

‘मुझे राजनीति छोड़ने और परिवार से अलग होने को कहा गया’

अपने संदेश में रोहिणी ने यह भी दावा किया कि संजय यादव और रमीज़ नामक दो लोगों ने उनसे ऐसा करने को कहा था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर किस संदर्भ में यह दबाव बनाया गया या वह किस बात का दायित्व अपने सिर ले रही हैं।
RJD से राज्यसभा सांसद और तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव तथा रमीज़ की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

चुनावी हार, अंदरूनी मतभेद और बढ़ता संकट

रोहिणी आचार्या, जो एक चिकित्सकीय पेशेवर हैं और सिंगापुर में अपनी पारिवारिक जिंदगी संभालती रही हैं, कुछ समय पहले लोकसभा चुनाव में सारण से प्रत्याशी बनी थीं, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। हाल के महीनों में उनका नाम RJD की अंदरूनी नाराज़गी के संदर्भ में भी चर्चा में रहा, विशेषकर तेज प्रताप यादव की पार्टी से निष्कासन के बाद।
इसके बावजूद, रोहिणी को विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के प्रचार में सक्रिय देखा गया था, जिससे परिवार में टूट की अफवाहें कुछ समय के लिए थम गई थीं।

NDA की बंपर जीत और RJD की चिंताएं

महागठबंधन को इस बार करारी शिकस्त मिली है। RJD की सीटें जहां 75 से घटकर सिर्फ 24 रह गईं, वहीं NDA ने 200 से अधिक सीटें जीतकर रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और जेडीयू ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज की।
ऐसे में रोहिणी का अचानक लिया गया फैसला पार्टी के भविष्य और नेतृत्व की एकता पर नए प्रश्न खड़े कर रहा है।

परिवार के भीतर दरार या राजनीतिक रणनीति?

लालू परिवार को RJD की राजनीतिक धुरी माना जाता रहा है। मगर रोहिणी के इस सीधे-सपाट ऐलान ने संकेत दिया है कि परिवार के भीतर खटास पहले की अपेक्षा कहीं गहरी हो सकती है।
पार्टी नेता अभी इस मुद्दे पर चुप हैं और किसी भी तरह के विवाद को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

 

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