पटना में प्रेमचंद की ‘पूस की रात’ ने किसान जीवन की पीड़ा को किया सजीव

पटना। प्रेमचंद रंगशाला में मंगलवार को रंगकर्मी संस्था रेनबो, रोहतास की ओर से मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘पूस की रात’ का प्रभावशाली नाट्य मंचन किया गया। अजीत कुमार के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को किसान जीवन की कठोर सच्चाइयों से रू-ब-रू कराया।

नाटक की कथा कर्ज़ और शोषण से जूझ रहे किसान हल्कू और उसकी पत्नी मुन्नी के संघर्ष को केंद्र में रखती है। लगान और गरीबी के बोझ तले दबा हल्कू कड़ाके की ठंड में खेत की रखवाली को मजबूर होता है। ठंड, भूख और विवशता के बीच उसकी लड़ाई न केवल प्रकृति से है, बल्कि उस व्यवस्था से भी है, जो किसान को अंतहीन पीड़ा में झोंक देती है। मंच पर ‘पूस की रात’ की भयावहता, नीलगायों द्वारा फसल का नष्ट होना और उसके बाद हल्कू के मन में उपजा अजीब-सा सुकून, दर्शकों को गहराई तक छू गया।

नाट्य रूपांतरण और परिकल्पना राज कपूर की रही, जबकि चंदन उगना का संगीत कथा की संवेदना को और प्रभावी बनाता नजर आया। सह-निर्देशक के रूप में निशा कुमारी ने प्रस्तुति को संतुलित और सशक्त स्वरूप दिया।

मंच पर देवेन्द्र झा, तनुजा, बिकेश आदित्य, रणधीर, सूरज, सनी, गुड्डू वैष्णवी, अर्चना, अंबुज, श्रेया, स्नेहा, पंकज सहित अन्य कलाकारों ने सशक्त अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने नाटक की सामाजिक चेतना और कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *