राजकुमार राव और वामीका की जोड़ी ने बांधा समां, ‘भूल चूक माफ’ बनी हल्की-फुल्की पारिवारिक मनोरंजन
पटना।
छोटे शहर की गलियों, बनारस की रौनक और एक टाइम लूप में फंसी प्रेम कहानी—राजकुमार राव और वामीका गब्बी स्टारर फिल्म भूल चूक माफ इन सबका दिलचस्प मेल है। शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई यह फिल्म दर्शकों को एक हल्का-फुल्का अनुभव देती है, जिसमें हास्य, भावनाएं और सामाजिक संदेश का मिश्रण है।
कहानी में ट्विस्ट, पर नयापन नहीं
फिल्म की कहानी रंजन (राजकुमार राव) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समय के एक अजीब से लूप में फंसा है। हर दिन वही दोहराव, लेकिन हर बार एक नई कोशिश। राजकुमार राव ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में रंजन के किरदार को जीवंत कर दिया है—हास्य और भावनाओं के संतुलन के साथ।
वामीका गब्बी की दमदार शुरुआत
इस फिल्म से बतौर लीड एक्ट्रेस वामीका गब्बी ने बॉलीवुड में कदम रखा है और ‘तितली’ के किरदार में उन्होंने एक नई ताजगी भरी है। उनकी और राजकुमार की केमिस्ट्री फिल्म की जान है। वामीका का संवाद “बबुआаа…” दर्शकों के बीच हिट हो चुका है।
बनारस की गलियों से सजी फिल्म की पृष्ठभूमि
फिल्म की शूटिंग बनारस की गलियों, घाटों और चाय की दुकानों पर हुई है, जो स्क्रीन पर जीवंत दिखती है। पहले हाफ में फिल्म की गति अच्छी है और कुछ दृश्य वाकई दिल को छूते हैं, हालांकि कुछ क्षणों में हंसी का पंच हल्का पड़ता है।
दूसरे हाफ में कमजोर हुई रफ्तार
फिल्म का दूसरा भाग थोड़ा ढीला पड़ता है और अंत तक आते-आते कहानी पहले से समझ में आने लगती है। सामाजिक संदेश जोड़ने की कोशिश थोड़ी बोझिल लगती है, जिससे मनोरंजन की लय टूटती है।
सहायक कलाकारों की सशक्त मौजूदगी
फिल्म में सीमा पाहवा, रघुवीर यादव और ज़ाकिर हुसैन जैसे कलाकारों ने भी अपने छोटे-छोटे किरदारों में जान डाल दी है। उनके दृश्य फिल्म को और रंगीन बनाते हैं।
कुल मिलाकर…
भूल चूक माफ एक पारिवारिक फिल्म है, जिसे पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है। हालांकि यह कोई अनोखी कहानी नहीं कहती, लेकिन इसकी सादगी, कलाकारों का अभिनय और बनारस की पृष्ठभूमि इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं।
रेटिंग: 2.5/5