शहीद रामफल मंडल की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने व पूर्व सांसद ब्रह्मानंद मंडल की मूर्ति स्थापना की मांग तेज
जमालपुर में शहीद रामफल मंडल की 101वीं जयंती पर अति पिछड़ा सेना ने उठाई सरकार से दोहरी मांग
जमालपुर (मुंगेर) – बिहार की आज़ादी की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीद रामफल मंडल की 101वीं जयंती के अवसर पर अति पिछड़ा सेना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई और राज्य सरकार से दो प्रमुख मांगें की गईं। पहली, शहीद रामफल मंडल की जीवनी को बिहार के सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, और दूसरी, मुंगेर के पूर्व सांसद स्वर्गीय ब्रह्मानंद मंडल की आदमकद मूर्ति को मुंगेर में सार्वजनिक स्थल पर स्थापित किया जाए।
यह जयंती समारोह जमालपुर के वलीपुर स्थित रामजीवन मंडल के आवास पर आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अति पिछड़ा सेना के संयोजक मुनीलाल मंडल द्वारा शहीद रामफल मंडल के तेलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
इस अवसर पर मुनीलाल मंडल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि “पूर्व सांसद ब्रह्मानंद मंडल ने मुंगेर के विकास के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने रेल-सह-सड़क पुल के निर्माण के लिए 14 दिनों तक आमरण अनशन किया था। उनकी मूर्ति की स्थापना पूरे बिहार को उनके संघर्ष और समर्पण से परिचित कराएगी।”
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं – अशोक कुमार मंडल, ओम जय कुमार, डॉ. रामानंद सिंह, रामजीवन मंडल, लाटोरी मंडल, दिनेश मंडल, संजय जी, नीरज मंडल, रोहित कुमार, रितेश कुमार और अन्य – ने भी सरकार से यह मांग की कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले रामफल मंडल जैसे सपूतों की जीवनी नई पीढ़ी को जाननी चाहिए और इसके लिए उन्हें स्कूली पाठ्यक्रम में स्थान देना अत्यंत आवश्यक है।
इस कार्यक्रम ने न केवल क्षेत्रीय नायकों की स्मृति को पुनर्जीवित किया बल्कि यह भी दर्शाया कि समाज अपने नायकों के योगदान को भुला नहीं सकता। अति पिछड़ा सेना ने यह स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका जनसंघर्ष जारी रहेगा।
प्रस्तुति: संवाददाता – जमालपुर से