सुशासन का नया अध्याय : गांधी मैदान में नीतीश कुमार ने ली दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ
पटना। ऐतिहासिक गांधी मैदान आज सुबह से ही राजनीतिक उत्साह और जनसैलाब का केंद्र बना रहा, जहां एनडीए की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष विमान से पटना पहुंचे और मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ मौजूद रहे।
दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए नीतीश कुमार ने अपने नए कार्यकाल की शुरुआत की। मंच पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्य, सांसद, विधायक और एनडीए के शीर्ष नेता उपस्थित रहे। लोकप्रिय भोजपुरी गायक एवं भाजपा सांसद मनोज तिवारी और पवन सिंह भी विशेष आमंत्रित अतिथियों के रूप में मंच पर मौजूद रहे, जिससे समारोह में सांस्कृतिक उत्साह भी देखने को मिला। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
गांधी मैदान में सुरक्षा और तैयारी के विशेष प्रबंध
शपथ ग्रहण कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में व्यापक व्यवस्था की। आम से लेकर खास तक बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के मद्देनजर सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती की गई। मुख्यमंत्री ने बुधवार शाम स्वयं तैयारियों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों से बैठने की व्यवस्था, मंच की संरचना और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
एनडीए की प्रचंड जीत ने तय किया नया राजनीतिक समीकरण
हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों पर जीत हासिल कर एक बार फिर सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत की है। इसमें भाजपा को 89, जदयू को 85, एलजेपी (आर) को 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटों का योगदान रहा। नेताओं के अनुसार जनता का यह फैसला केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर भरोसे का संकेत है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि जनता ने एनडीए के विकास मॉडल पर मुहर लगाई है और यह भरोसा आगे भी कायम रहेगा। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “बिहार में बहार है, क्योंकि यहां विकास और स्थिरता का संदेश देने वाली सरकार बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकास की राजनीति ने रफ्तार पकड़ी है।”
नई सरकार से उम्मीदें
नीतीश कुमार के दसवें कार्यकाल से राज्य में प्रशासनिक स्थिरता और विकास के नए चरण की उम्मीद की जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह में उमड़ी भीड़ और नेताओं की व्यापक उपस्थिति ने यह साफ किया कि बिहार की जनता और सियासत—दोनों ही नए अध्याय को लेकर उत्साहित हैं।
यह शपथ केवल सरकार गठन का रुस्तम नहीं, बल्कि बिहार में सुशासन की नई राह का आगाज़ माना जा रहा है।