TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर EC के फैसले को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
कोलकाता, 18 सितंबर 2026: तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें पार्टी के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। यह मामला TMC के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका
ममता बनर्जी की ओर से शुक्रवार को दाखिल याचिका डायरी नंबर 58005/2026 के तहत दर्ज की गई है। इसमें ममता बनर्जी याचिकाकर्ता हैं, जबकि चुनाव आयोग, आयोग के सचिव और प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया गया है।
EC ने TMC के नाम और सिंबल पर लगाई रोक
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने कहा कि दोनों गुट पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं और विवाद पर निर्वाचन चिन्ह आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत विस्तृत निर्णय की जरूरत है।
उपचुनाव के लिए नए नाम और चिन्ह
आयोग ने दोनों गुटों से आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह देने को कहा। बाद में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित किया गया।
6 अक्टूबर को होने हैं उपचुनाव
यह विवाद पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, नंदीग्राम और रेजीनगर समेत विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित हैं।
पार्टी के भीतर संगठनात्मक विवाद
TMC के भीतर दोनों पक्ष पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। इसी विवाद का असर संसद में भी दिखाई दिया है, जहां 20 बागी TMC लोकसभा सांसदों के अलग समूह के रूप में मान्यता का दावा करने की बात सामने आई है। इस मामले में ममता बनर्जी गुट की ओर से लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया है।